New Delhi: अमेरिका और ईरान में तनाव के बीच होर्मुज में संकट बरकरार है. मालवाहक जहाजों की आवाजाही अब भी कम है. रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से बुधवार को केवल छह कमोडिटी जहाज गुजरे. यह संख्या एक दिन पहले के 11 जहाजों के मुकाबले काफी कम है और पिछले 10 दिनों के करीब 13 जहाज प्रतिदिन के औसत से भी नीचे है.
नुकसान की ओर दुनिया का ध्यान दिलाया
इस बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) चीफ क्रिस्टालिना जॉर्जिवा ने इस स्थिति से होने वाले नुकसान की ओर दुनिया का ध्यान दिलाया है. शिप-ट्रैकिंग कंपनी केप्लर के ताजा आंकड़ों का हवाला देते हुए रॉयटर्स ने बताया कि बुधवार को जलडमरूमध्य से गुजरने वाले छह जहाजों में दो बहुत बड़े गैस कैरियरए दो लॉन्ग-रेंज टैंकर, एक सुप्रामैक्स टैंकर और एक पैनामैक्स टैंकर शामिल थे. जहाजों की आवाजाही में यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव फिर बढ़ गया है.
समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है. केप्लर के आंकड़े प्रारंभिक हैं और इनमें बदलाव संभव है. इसकी वजह यह है कि कुछ जहाज यात्रा के दौरान अपने ट्रांसपोंडर बंद कर देते हैं, जिससे उनका वास्तविक आवागमन तत्काल शिप-ट्रैकिंग आंकड़ों में दर्ज नहीं हो पाता.
जहाजों के लिए सुरक्षा जोखिम
हालांकि लगातार कम होती जहाज आवाजाही इस बात का संकेत है कि होर्मुज से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों के लिए सुरक्षा जोखिम बढ़ गया है. ईरान ने हाल में कई जहाजों को अपनी ब्लैकलिस्ट में भी शामिल किया है, जिससे तेल और गैस कारोबार के लिए जोखिम बढ़ा है. IMF प्रमुख ने चेतावनी दी है कि होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से दुनिया भर में कर्ज लेने की लागत बढ़ रही है और विकासशील देशों की कर्ज से जुड़ी प्रगति खतरे में पड़ रही है.
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