New Delhi: अमेरिका अब ईरान के खिलाफ किसी बड़े सैन्य हमले की तैयारी कर रहा है. थाइलैंड में USS अब्राहम लिंकन करीब 286 दिन की लंबी तैनाती के बाद आराम कर रहा है. वहीं अब उसकी जगह अमेरिकी नौसेना ने अरब सागर में USS जॉर्ज वाशिंगटन को मोर्चे पर उतार दिया है और USS बॉक्सर भी ईरान की नाकाबंदी वाले ऑपरेशन में एक्टिव है. अमेरिका के एक कैरियर ने कदम पीछे कर लिए हैं, वहीं दूसरा उसकी जगह ले रहा है और एम्फीबियस असॉल्ट शिप USS बॉक्सर भी मैदान में है.
अमेरिकी नौसेना के लिए आसान नहीं
USS अब्राहम लिंकन की तैनाती अमेरिकी नौसेना के लिए आसान नहीं रही. यह जहाज 286 दिन तक तैनात रहा और करीब 250 दिन बिना किसी पोर्ट कॉल के समुद्र में खड़ा रहा है. भारी विवाद के बाद 2 सितंबर को थाइलैंड के पटाया में इसे रुकने का मौका दिया गया. इसके साथ ही करीब 5,000 सैनिकों और मरीन्स को जमीन पर उतरने का मौका मिला. लंबी तैनाती के दौरान क्रू की हालत, रखरखाव और सप्लाई को लेकर भी सवाल उठे.
कुछ सैनिकों के समुद्र में कूदने की कोशिश
रिपोर्टों में मोल्ड, प्लंबिंग फेलियर और दूसरी परेशानियों का जिक्र हुआ. कुछ सैनिकों के समुद्र में कूदने की कोशिशों की खबरों के बाद अमेरिकी सांसदों ने भी पेंटागन से जवाब मांगा. ऐसे में लिंकन का पीछे हटना स्वाभाविक रूप से राहत और रोटेशन का हिस्सा हो सकता है. लेकिन इस बात की संभावना भी हो सकती है कि वह अपनी सप्लाई भरकर वापस ईरान के पास लौट जाए. लिंकन के पीछे हटने से पहले ही अमेरिका ने उसकी जगह USS जॉर्ज वाशिंगटन को आगे बढ़ा दिया.
लिंकन को राहत देना मकसद
निमित्ज क्लास का यह सुपरकैरियर जापान के योकोसुका से फॉरवर्ड डिप्लॉय था. पिछले महीने यह USS रॉबर्ट स्माल्स और USS शॉप के साथ अरब सागर पार कर CENTCOM क्षेत्र में पहुंचा. इसका मकसद लिंकन को राहत देना बताया गया है. यानी अमेरिका ने मध्य पूर्व में कैरियर प्रेजेंस खत्म नहीं होने दी. इसी बीच USS बॉक्सर की गतिविधि ने तस्वीर को और दिलचस्प बना दिया है. बॉक्सर कोई पारंपरिक सुपर कैरियर नहीं है. यह वॉस्प-क्लास एम्फीबियस असॉल्ट शिप है. इसके साथ 11th मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट मौजूद है और जहाज पर 2,600 से ज्यादा सैनिक और मरीन्स तैनात हैं.
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