Saturn Planet: शनि ग्रह और उसके छल्ले के बाद वैज्ञानिकों को शनि के दक्षिणी ध्रुव पर अब एक और रहस्यमय चीज दिखी है. दरअसल, शनि के दक्षिणी ध्रुव पर बादलों से बना एक विशाल 10 भुजाओं वाला स्ट्रक्चर नजर आया है, जिसे डेकागोन कहा जा रहा है. वैज्ञानिकों के इस खोज ने विज्ञान की दुनिया में तहलका मचा दी है.
बता दें कि दशकों से वैज्ञानिक शनि के उत्तरी ध्रुव पर एक छह भुजाओं वाले हेक्सागोन को देखते आ रहे थे. यह नया 10 भुजाओं वाला स्ट्रक्चर उससे कहीं अधिक बड़ा और हैरान करने वाला है. साल 2023 में नासा के हबल स्पेस टेलीस्कोप ने इसकी कुछ चौंकाने वाली तस्वीरें कैद की थीं. वैज्ञानिकों के इस खोज ने साबित कर दिया है कि शनि ग्रह का मौसम हमारी सोच से भी अधिक जटिल है.
कितना बड़ा है शनि ग्रह पर मिला यह नया रहस्यमय स्ट्रक्चर?
- रिसर्च के मुताबिक, इस नए डेकागोन की चौड़ाई लगभग 1,67,820 किलोमीटर है. इसकी 10 भुजाओं में से हर एक की लंबाई करीब 16,782 किलोमीटर मापी गई है. इसकी तुलना में, पृथ्वी का उत्तर से दक्षिण ध्रुव तक का व्यास लगभग 12,714 किलोमीटर है.
- स्पेन की यूनिवर्सिटी ऑफ द बास्क कंट्री के प्लैनेटरी साइंटिस्ट अगस्टिन सांचेज-लावेगा इस स्टडी के लीड ऑथर हैं. अगस्टिन सांचेज लावेगा ने कहा कि ‘यह एक बहुत ही असामान्य वायुमंडलीय घटना है जो हमें मौसम विज्ञान को समझने में मदद कर रही है.’ उन्होंने यह भी बताया कि अब शनि का हेक्सागोन कोई इकलौता अनोखा फीचर नहीं रह गया है.
इतने सालों बाद कैसे दिखा यह डेकागोन?
अगस्टिन ने बताया कि यह खोज उनके लिए बहुत बड़ा सरप्राइज थी. जब से उत्तरी ध्रुव पर हेक्सागोन मिला था, तब से वे दक्षिण में भी ऐसे ही किसी आकार की तलाश कर रहे थे, लेकिन सालों तक उन्हें कोई सफलता नहीं मिली. इस नए डेकागोन को शनि का एक चक्कर पूरा करने में करीब 800 दिन लगते हैं.
बादलों ने 10 भुजाओं वाली अजीब शक्ल क्यों ले ली है?
पुरानी रिसर्च के मुताबिक, शनि का हेक्सागोन तेज हवाओं के घुमावदार रास्ते की वजह से बना था. कंप्यूटर सिमुलेशन से पता चला है कि यह डेकागोन भी इसी तरह के एक घुमावदार वायुमंडलीय जेट की वजह से बना है. उत्तरी ध्रुव का हेक्सागोन दशकों से काला ही नजर आता है. इसके विपरीत यह नया डेकागोन अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग डार्कनेस दिखाता है. इसका सीधा मतलब यह हो सकता है कि यह अभी भी बन रहा है और इसमें लगातार बदलाव हो रहे हैं.
क्या भविष्य में टूट जाएगा शनि का यह रहस्यमय डेकागोन?
वैज्ञानिक अब इस डेकागोन के विकास को करीब से समझना चाहते हैं. वो अब ये पता लगाना चाहते हैं कि आने वाले सालों में यह टूट जाएगा या फिर और भी ज्यादा मजबूत होगा. वैज्ञानिकों के मुताबिक, साल 2032 में शनि के इस हिस्से पर सोलर रेडिएशन अपने पीक पर होगा. ऐसे में रिसर्चर्स इन बादलों के तापमान और हवाओं की 3D संरचना को भी समझना चाहते हैं. इससे उन्हें इन आकारों के बनने का एक एडवांस मॉडल तैयार करने में मदद मिलेगी.

