Saudi Arabia: सऊदी अरब, ओमान, बहरीन, जॉर्डन और यूएई ने इस साल तीन लाख से ज्यादा विदेशी कामगारों को देश से निकाला है या निकालने की योजना बना रहे हैं. ये लोग मुख्य रूप से अफ्रीकी देशों- इथियोपिया, युगांडा, नाइजीरिया और केन्या के रहने वालें हैं.खाड़ी देशों की ये कार्रवाई उन मजदूरों के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया है, जो नियम तोड़कर रह रहे थे.
बता दें कि इस अभियान के दौरान सऊदी अरब ने सबसे ज्यादा विदेशी लोगों को निकाला है. बिजनेस इनसाइडर अफ्रीका ने सऊदी गजट की डिपोर्टेशन रिपोर्ट का विश्लेषण के दौरान पाया है कि सऊदी अरब ने 2026 में जनवरी से 26 अगस्त तक 30 बार प्रवर्तन अभियान चलाए है, जिसके बाद रेजिडेंसी, लेबर और बॉर्डर कानूनों का उल्लंघन करने वाले कम से कम 332,774 लोगों को देश से निकाला है.
सऊदी में सबसे ज्यादा सख्ती
सऊदी अरब ने केवल 20 से 26 अगस्त के बीच ही 14,905 लोगों को देश से निकाला है, साथ ही 14,434 अन्य लोगों को गिरफ्तार भी किया है, जो सऊदी में गैर-कानूनी तरीके से घुसने की कोशिश करते पकड़े गए है. अवैध घुसपैठियों में अफ्रीकी नागरिक बड़ी संख्या में शामिल थे. इसके अलावा 20 से 26 अगस्त के बीच हुई गिरफ्तारियों में 58 प्रतिशत इथियोपियाई नागरिक थे.
इससे पहले सऊदी मीडिया ने बताया था कि 6 से 12 अगस्त के बीच गैर-कानूनी तरीके से घुसने के आरोप में गिरफ्तार किए गए 1,457 लोगों में 67 प्रतिशत इथियोपियाई थे. उस दौरान 12,945 लोगों को उनके देश वापस भेजा गया था. सऊदी अरब की हालिया कार्रवाई में युगांडा के नागरिक भी शामिल पाए गए हैं. साथ ही केन्या के नागरिक भी इससे प्रभावित हुए हैं.
ओमान और बहरीन ने भी की सख्ती
ओमान ने साल 2026 के पहले छह महीनों में 2,944 विदेशी वर्करों को देश से निकाला. इस दौरान अधिकारियों ने 6,707 निरीक्षणों के बाद लेबर कानूनों का उल्लंघन करने वाले 11,172 विदेशी नागरिकों की पहचान की. ऐसे में 4,680 अन्य मामलों को अभियोजकों को भेजा गया.
इसके अलावा, बहरीन की लेबर मार्केट रेगुलेटरी अथॉरिटी ने बताया है कि अगस्त में 3,152 निरीक्षणों और अभियानों के बाद 543 विदेशियों को देश से निकाला गया, जबकि 77 अन्य वर्करों को लेबर और रेजिडेंसी कानूनों के उल्लंघन के लिए हिरासत में लिया गया है.
जॉर्डन ने भी तय की सितंबर की समय-सीमा
जॉर्डन ने बिना दस्तावेज वाले विदेशी कामगारों को अपनी स्थिति को वैध बनाने के लिए 30 सितंबर, 2026 तक का समय दिया है, जिसके तहत 1 अक्टूबर से नियमों का उल्लंघन करने वालों को देश से निकाले जाने (डिपोर्टेशन) के लिए चिह्नित किया जाएगा. वहीं, यूएई ने भी रेजीडेंसी नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है. दुबई के अल अविर सेंटर ने 2026 की पहली छमाही में 11,696 मामलों को संभाला और घर लौटने वालों के लिए हवाई टिकट उपलब्ध कराए.
अफ्रीकी प्रवासियों पर बढ़ा दबाव
हाल ही सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, खाड़ी में कड़े नियमों से सबसे अधिक अफ्रीकी देशों के लोग प्रभावित हो रहे हैं, जिसमें इथियोपियाई, युगांडा, नाइजीरिया, सोमालिया, सूडान और केन्या जैसे देशों के लोगों पर सबसे ज्यादा असर होता दिखा है.
बता दें कि अरब देशों में खासतौर से अफ्रीका और साउथ एशिया के गरीब देशों के लोग काम के लिए जाते हैं. इसके अलावा भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका के लोग भी खाड़ी में बड़ी संख्या में काम करते हैं.

