Dhaka: पाकिस्तान-सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते में बांग्लादेश भी शामिल होना चाहता है. इन्हीं अटकलों के बीच एक रिपोर्ट ने बांग्लादेश को सतर्क रहने की सलाह दी है. चेतावनी दी गई है कि इस गठबंधन में शामिल होने से देश ऐसी सुरक्षा प्रतिबद्धताओं में फंस सकता है, जो उसके राष्ट्रीय हितों के अनुकूल नहीं होगी. बांग्लादेशी दैनिक ‘द डेली ऑब्जर्वर’ की एक रिपोर्ट कहती है कि किसी भी जंग में शामिल होने से पहले देश को सौ बार सोचने की जरूरत होगी.
सुरक्षा प्राथमिकताएं खुद तय करे?
बांग्लादेश के सामने चुनौती बड़ी है. उसे फैसला करना है कि क्या वह किसी दूसरे देश की सुरक्षा रणनीति का हिस्सा बने या अपनी सुरक्षा प्राथमिकताएं खुद तय करे? उसे अपनी समझ-बूझ नहीं खोनी चाहिए और न ही खुद को किसी खतरनाक जाल में फंसने देना चाहिए. रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि जब कोई देश किसी सैन्य गठबंधन में शामिल होता है, तो वह सिर्फ किसी दस्तावेज पर दस्तखत नहीं करता, बल्कि अपने भविष्य के कुछ फैसले दूसरों के हाथों में सौंप देता है.
सामूहिक सुरक्षा का भरोसा
पहली नजर में ऐसी व्यवस्था दोस्ती, भाईचारे, आपसी सहयोग और सामूहिक सुरक्षा का भरोसा दिलाती हुई लग सकती है. लेकिन गहराई से देखने पर मुश्किल सवाल खड़े होते हैं. इसलिए, बांग्लादेश को ‘मक्का जॉइंट डिफेंस’ समझौते में शामिल करने पर हो रही बहस सिर्फ कूटनीतिक शिष्टाचार का मामला नहीं है. यह देश की सुरक्षा, संप्रभुता, अर्थव्यवस्था और लंबे समय से चली आ रही विदेश नीति से जुड़ा मामला है.
सुरक्षा सहयोग का विचार आकर्षक
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि एक मुस्लिम-बहुल देश होने के नाते, बांग्लादेश को स्वाभाविक रूप से सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के साथ सुरक्षा सहयोग का विचार आकर्षक लग सकता है. लेकिन देशों को भावनाओं के आधार पर नहीं चलाया जा सकता. उनका अस्तित्व आखिरकार भूगोल, अर्थव्यवस्था, सैन्य क्षमता और राष्ट्रीय हित की कठोर वास्तविकताओं पर निर्भर करता है.
तुर्की की सुरक्षा रणनीतियां
बांग्लादेश फिलहाल सैन्य खतरे का सामना सीधे तौर पर नहीं कर रहा है, जबकि सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की की अपनी अलग-अलग सुरक्षा चिंताएं हैं. ईरान-सऊदी प्रतिद्वंद्विता, भारत-पाकिस्तान तनाव और इजरायल को लेकर तुर्की की सुरक्षा रणनीतियां उनकी अपनी वास्तविकताओं को दर्शाती हैं, जो बांग्लादेश की स्थिति से अलग हैं.
इसे भी पढ़ें. PAKISTAN का हर 16 में से एक बच्चा ऑनलाइन शोषण का शिकार, रिेपोर्ट में हैरान करने वाला खुलासा

