BRICS में पाकिस्तान की बेइज्जती! पहलगाम हमले की निंदा पर खास दोस्त चीन ने भी जताई सहमति

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New Delhi: समिट के घोषणा पत्र में पहलगाम हमले की निंदा और आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देने वालों को जवाबदेह ठहराए जाने पर पाकिस्तान के खास दोस्त चीन ने भी सहमति जताई है. चीन और पाकिस्तान की दोस्ती को आयर ब्रदरहुड कहा जाता है. पिछले कई सालों से चीन को पाकिस्तान के सबसे बड़े रणनीतिक समर्थक के तौर पर देखा जा रहा है. चीन का भी इसके पीछे अपना मतलब है. वह पाक के भरोसे ही अरब सागर तक पहुंच रहा है. इस रिश्ते की महत्वपूर्ण कड़ी चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा है.

पहलगाम आतंकी हमले की निंदा

हालांकि BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान जब पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की गई और आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात कही गई तो चीन भी इससे सहमत नजर आया. पिछले साल अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी. BRICS के नई दिल्ली घोषणा पत्र में इस हमले की कड़ी निंदा की गई. साथ ही आतंकियों की सीमा पार आवाजाही, आतंकवाद के समर्थन और सुरक्षित ठिकानों पर कार्रवाई की मांग की गई.

इस बयान पर चीन ने भी जताई सहमति 

घोषणा पत्र में पाकिस्तान का नाम नहीं लिया गया, लेकिन यह साफ कहा गया कि आतंकवाद में शामिल लोगों और उन्हें समर्थन देने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. भारत के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि इस बयान पर चीन ने भी सहमति जताई. पहलगाम हमले की निंदा BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हुई थी, लेकिन नई दिल्ली घोषणा का महत्व ज्यादा है. इसकी वजह यह है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत और चीन 2020 के गलवान संघर्ष के बाद अपने रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

मंच से पहलगाम हमले की निंदा एक बड़ा कूटनीतिक संकेत

नई दिल्ली में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी और उसी मंच से पहलगाम हमले की निंदा एक बड़ा कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है. इससे यह संदेश गया कि चीन भारत की सुरक्षा चिंताओं को पूरी तरह नजरअंदाज करने की स्थिति में नहीं है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि चीन ने पाकिस्तान का साथ छोड़ दिया है. लेकिन इतना जरूर है कि अब बीजिंग हर मुद्दे पर पाकिस्तान के पक्ष में नहीं खड़ा है.

पाकिस्तान रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण

चीन के लिए पाकिस्तान रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है. CPEC पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से गुजरता है और ग्वादर बंदरगाह चीन को अरब सागर तक पहुंच देता है. मगर भारत का चीन की नजर में कम महत्व नहीं है. इंडिया दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और चीन के लिए एक बड़ा बाजार भी है. ऐसे में बीजिंग भारत के साथ स्थिर संबंध बनाए रखने के पक्ष में है.

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