New Delhi: चीन ने दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी को एक और बड़ा विस्तार दिया है. लाओस में नया एयरबेस बनाया है. 29 सितंबर को चीन के रक्षा मंत्रालय ने लाओस के बान क्यून एयरपोर्ट पर चीन-लाओस जॉइंट सपोर्ट एंड ट्रेनिंग सेंटर और चीन-लाओस फ्रेंडशिप एविएशन एकेडमी के संचालन की घोषणा की. चीन इसे पायलट ट्रेनिंग और दोनों देशों के सैन्य सहयोग का केंद्र बता रहा है, लेकिन रणनीतिक विशेषज्ञों की नजर में इसकी अहमियत इससे कहीं ज्यादा हो सकती है.
बीजिंग दौरे के बाद हुआ उद्घाटन
उद्घाटन समारोह में लाओस के डिफेंस मिनिस्टर खामलींग औथाकेसन ने शिरकत की. इत्तेफाक से, नए बेस का उद्घाटन जून में लाओस के प्रेसिडेंट थोंगलून सिसोलिथ के चेयरमैन शी जिनपिंग से मिलने के लिए बीजिंग दौरे के बाद हुआ है. उस मौके पर शी ने नेशनल डिफेंस जैसे कई मुद्दों पर स्ट्रेटेजिक बातचीत की थी. बान क्यून एयर बेस लाओस की राजधानी वियनतियाने से करीब 50 किलोमीटर उत्तर में है. यहां करीब 2,000 मीटर लंबा रनवे, टैक्सीवे, पार्किंग एप्रन, एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर और पांच हैंगर हैं.
अब इस पर चीन का कंट्रोल
यह इलाका पहले अमेरिकी सैन्य और CIA के एयरबेस नेटवर्क के तहत आने वाले लिमा साइट 44 का हिस्सा था. लेकिन अब इस पर चीन का कंट्रोल हो गया है. चीन का दावा है कि इस सेंटर का मकसद लाओस की एयरफोर्स के पायलटों की ट्रेनिंग मजबूत करना है. चीन का कहना है कि दोनों देश इसे मिलकर चलाएंगे और इसका उद्देश्य सैन्य सहयोग बढ़ाना और इलाके में शांति और स्थिरता में योगदान देना है. चीन ने साफ कहा है कि यह बेस किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है.
तीसरे देश के खिलाफ़ न होने की बात
जहां तक तीसरे देश के खिलाफ़ न होने की बात है, तो इस डेवलपमेंट से सबसे ज़्यादा चिंता वियतनाम को होगी. चीन ने 1979 में वियतनाम पर हमला करवाया था. यह एयरबेस PLA को अपनी मौजूदा दक्षिण-पश्चिमी सीमा से लगभग 400km दक्षिण में इंडोचीन पेनिनसुला में पैर जमाने का मौका देता है. यह लोकेशन वियतनाम के ठीक पश्चिम में भी है. इसका मतलब है कि चीन इसका इस्तेमाल इंडोचीन में गहराई तक असर डालने के लिए कर सकता है.
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