उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षणों से आए 1,399 भूकंप, 2 हजार साल शांत रहा इलाका, स्टडी का दावा

Aarti Kushwaha
Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Must Read
Aarti Kushwaha
Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

North Korea Nuclear Test: उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षणों को लेकर एक नई वैज्ञानिक रिपोर्ट सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है. स्टडी के अनुसार, माउंट मंताप क्षेत्र में साल 2008 से 2025 के बीच 1,399 भूकंप दर्ज किए गए, जिनका संबंध वहां किए गए भूमिगत परमाणु विस्फोटों से हो सकता है. वहीं, शोधकर्ताओं का कहना है कि साल 2017 के सबसे बड़े परमाणु परीक्षण के बाद भूकंपीय गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई. विस्फोट के कारण पहाड़ के भीतर मौजूद पुरानी दरारें सक्रिय हो गईं और चट्टानों में बने नए फ्रैक्चर तथा पानी के दबाव की वजह से छोटे-छोटे भूकंप लगातार आते रहे.

1,399 भूकंप दर्ज होने का दावा

वैज्ञानिकों ने साल 2008 से 2025 के बीच के भूकंपीय आंकड़ों का विश्लेषण किया. इस दौरान माउंट मंताप के आसपास 1,399 भूकंप दर्ज किए गए. बता दें कि यह वही पर्वतीय क्षेत्र है जहां उत्तर कोरिया ने 2006 से 2017 के बीच छह भूमिगत परमाणु परीक्षण किए थे. ऐसे में शोधकर्ताओं का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर भूकंपीय गतिविधि का सामने आना असामान्य है.

2,000 वर्षों तक शांत था इलाका

शोध के अनुसार, माउंट मंताप और उसके आसपास का क्षेत्र पिछले करीब दो हजार वर्षों से काफी शांत माना जाता था. वैज्ञानिकों ने बताया कि चीन और कोरिया के ऐतिहासिक रिकॉर्ड में इस इलाके में भूकंप की घटनाएं बेहद कम मिलती हैं. इसी वजह से परमाणु परीक्षणों के बाद बढ़ी गतिविधियों ने शोधकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया.

2017 के परीक्षण के बाद बदली स्थिति

स्टडी के मुताबिक, साल 2013 में उत्तर कोरिया के तीसरे परमाणु परीक्षण के बाद पहला भूकंप दर्ज किया गया था. हालांकि पिछले कुछ वर्षों तक भूकंपों की संख्या बहुत कम रही. यह स्थिति साल 2017 में बदली, जब उत्तर कोरिया ने अपना छठा और सबसे बड़ा परमाणु परीक्षण किया. इसके बाद क्षेत्र में भूकंपों की संख्या और आवृत्ति दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई.

6.3 तीव्रता का झटका और सुरंग धंसने की आशंका

शोधकर्ताओं के अनुसार, साल 2017 के परमाणु परीक्षण से 6.3 तीव्रता का भूकंप पैदा हुआ था. इस विस्फोट के वजह से एक सुरंग के धंसने और पहाड़ की चोटी का आकार करीब 3 मीटर तक बदल गया था. वही, वैज्ञानिकों का मानना है कि इसी घटना ने इलाके की भूगर्भीय संरचना को प्रभावित किया.

अधिकांश भूकंप रहे छोटे

हालांकि इन परीक्षणों के बाद दर्ज किए गए अधिकांश भूकंप बहुत अधिक शक्तिशाली नहीं थे. पुसान नेशनल यूनिवर्सिटी के भूवैज्ञानिक विज्ञान विभाग के प्रोफेसर किम ने बताया कि अधिकांश भूकंपों की तीव्रता 2 से 3 के बीच थी, जो जमीन की अपेक्षाकृत कम गहराई पर आए थे. उन्होंने बताया कि परमाणु परीक्षण शुरू होने से पहले इस क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधि बहुत कम थी. उन्होंने कहा कि ‘चीन और कोरिया में हमारे पास 2,000 वर्षों से अधिक का ऐतिहासिक रिकॉर्ड है. करीब 100 किलोमीटर दूर सिर्फ एक घटना का उल्लेख मिलता है. मैं यह नहीं कह सकता कि यहां कभी भूकंप नहीं आया, लेकिन इस क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधि बहुत कम थी.’

पुरानी दरारों के फिर सक्रिय होने की आशंका

शोधकर्ताओं के मुताबिक, भूकंपों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत हो सकती है कि साल 2017 के शक्तिशाली विस्फोट के बाद माउंट मंताप के नीचे की जमीन अपनी पुरानी स्थिति में वापस नहीं लौट सकी. प्रोफेसर किम के अनुसार, इस विस्फोट के बाद कम से कम दो पुराने भ्रंश (फॉल्ट) फिर से सक्रिय हो गए.

पानी के दबाव से आ रहे हैं झटके

उनका कहना है कि विस्फोट ने पहाड़ के अंदर मौजूद निष्क्रिय दरारों को दोबारा सक्रिय कर दिया. इसके अलावा विस्फोट से चट्टानों में नई दरारें भी बन गईं, जिनमें पानी भर गया. इस पानी के दबाव के कारण चट्टानें आपस में खिसक रही हैं, जिससे लगातार छोटे-छोटे भूकंप आ रहे हैं.

Latest News

भूटान में 4.9 की तीव्रता से आया भूकंप, भारत में भी डोली धरती, असम में लोगों को संयम बरतने की सलाह

New Delhi: भूटान में शनिवार शाम तेज भूकंप आया, जिससे दहशत फैल गई. पूर्वोत्तर भारत में भी इसके झटके...

More Articles Like This