Washington: संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भाषण के दौरान ईरान और क्यूबा दोनों प्रमुख निशाने पर रहे. मंगलवार को क्यूबा और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों ने ट्रंप के विवादित भाषण पर विरोध दर्ज कराया. ईरान के प्रतिनिधियों ने सैन्य कार्रवाई और ट्रंप की धमकियों पर विरोध दर्ज कराया, जबकि क्यूबा के प्रतिनिधियों ने अपने देश को विफल देश बताए जाने के बाद सदन छोड़ दिया. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची न्यूयॉर्क में मौजूद थे, लेकिन ट्रंप के भाषण के दौरान वे महासभा कक्ष में नहीं पहुंचे.
दोनों देशों के बीच गहरे राजनीतिक तनाव
वहां ईरान के निचले स्तर के अधिकारी और प्रतिनिधि मौजूद थे, जो ट्रंप के संबोधन के करीब 10 मिनट बाद बाहर निकल गए. दोनों घटनाओं ने महासभा के दौरान अमेरिका और इन दोनों देशों के बीच गहरे राजनीतिक तनाव को सामने ला दिया. ट्रंप ने क्यूबा को विफल देश बताते हुए कहा कि वहां की साम्यवादी सरकार पर अभूतपूर्व दबाव है और वह गिर जाएगी. इसके बाद क्यूबा का प्रतिनिधिमंडल महासभा कक्ष से बाहर चला गया. ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि उनका प्रशासन क्यूबा की स्थिति में बुनियादी बदलाव लाने की दिशा में काम कर रहा है.
अधिकार को स्वीकार करने में असमर्थ
उन्होंने कहा कि क्यूबा की सरकार पहले से कहीं अधिक दबाव में है और दावा किया कि द्वीप पर आजादी आएगी. ट्रंप की इन टिप्पणियों के बाद क्यूबाई प्रतिनिधियों ने सदन से बहिर्गमन किया. क्यूबा के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिग्ज कर रहे हैं. उन्होंने ट्रंप के बयानों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका क्यूबा के स्वतंत्र और संप्रभु देश होने के अधिकार को स्वीकार करने में असमर्थ है.
क्यूबा तथा अन्य देशों के लिए खतरा
रोड्रिग्ज ने कहा कि अमेरिका की आर्थिक पाबंदियां और ऊर्जा से जुड़ा दबाव क्यूबा तथा अन्य देशों के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं. उन्होंने अमेरिकी नीति को सामूहिक दंड बताते हुए कहा कि क्यूबा शांति चाहता है और उसे शांति से रहने का अधिकार है. क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल दियाज-कानेल ने भी ट्रंप की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि उनका देश अपनी संप्रभुता की रक्षा करता रहेगा.
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