NSE IPO Listing: भारतीय शेयर बाजार में एनएसई की सुस्त शुरुआत, 0.84% के प्रीमियम के साथ हुआ लिस्ट

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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NSE IPO Listing: शेयर बाजार में लंबे समय से इंतजार किए जा रहे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया के आईपीओ की लिस्टिंग हो गई है. हालांकि, निवेशकों को जिस तरह के लिस्टिंग गेन की उम्मीद थी, उसके मुकाबले शेयर की शुरुआत मामूली बढ़त के साथ हुई. गुरुवार को एनएसई का शेयर बीएसई पर 1,800 रुपये प्रति शेयर के भाव पर लिस्ट हुआ, जो इसके 1,785 रुपये के इश्यू प्राइस से महज 0.84 फीसदी ज्यादा है. आईपीओ को निवेशकों की ओर से अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी, लेकिन लिस्टिंग के समय ग्रे मार्केट प्रीमियम में आई गिरावट भी चर्चा में रही.

1,785 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले 1,800 रुपये पर लिस्ट हुआ शेयर

एनएसई के शेयर की लिस्टिंग 1,800 रुपये प्रति शेयर पर हुई. आईपीओ के लिए प्राइस बैंड 1,700 रुपये से 1,785 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था. इस हिसाब से शेयर अपने अपर प्राइस बैंड से केवल 15 रुपये ऊपर लिस्ट हुआ. आईपीओ 17 सितंबर से 21 सितंबर तक निवेश के लिए खुला था. इस इश्यू को कुल 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था. आईपीओ का कुल आकार 22,568.94 करोड़ रुपये था, जबकि निवेशकों ने इसके लिए 90,287.33 करोड़ रुपये की बोलियां लगाई थीं.

भारत का दूसरा सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू बना NSE IPO

एनएसई का आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल रहा. 22,568.94 करोड़ रुपये का यह इश्यू 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ रुपये के आईपीओ के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू था. यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) था. इसके तहत कंपनी के मौजूदा शेयरधारकों ने कुल 12.64 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री की. यानी इस इश्यू के जरिए नए शेयर जारी करने के बजाय मौजूदा शेयरधारकों ने अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचा.

लिस्टिंग से पहले तेजी से गिरा ग्रे मार्केट प्रीमियम

एनएसई के आईपीओ को लेकर शुरुआत में ग्रे मार्केट में मजबूत सेंटीमेंट देखने को मिला था. इश्यू खुलने से पहले इसका ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) करीब 200 रुपये प्रति शेयर तक पहुंच गया था. उस समय इससे 8 फीसदी से अधिक संभावित लिस्टिंग गेन का संकेत मिल रहा था. हालांकि, लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट प्रीमियम में तेजी से गिरावट आई. बुधवार को यह कथित तौर पर घटकर 43 रुपये प्रति शेयर रह गया था. ऐसे में आईपीओ की लिस्टिंग के समय निवेशकों की नजर इस बात पर थी कि शेयर बाजार में इसकी शुरुआत किस भाव पर होती है.

किस श्रेणी के निवेशकों ने कितनी लगाई बोली?

एनएसई के आईपीओ को निवेशकों की अलग-अलग श्रेणियों से प्रतिक्रिया मिली. सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों के मुताबिक, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स का हिस्सा 12.68 गुना सब्सक्राइब हुआ. वहीं, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की श्रेणी में 6.55 गुना और रिटेल इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स (RII) की श्रेणी में 1.39 गुना सब्सक्रिप्शन दर्ज किया गया. इस तरह आईपीओ में सबसे ज्यादा मांग संस्थागत निवेशकों की ओर से देखने को मिली.

NSE की कमाई में ट्रांजैक्शन चार्ज की बड़ी हिस्सेदारी

एनएसई की आय का एक बड़ा हिस्सा ट्रांजैक्शन चार्ज से आता है. वित्त वर्ष 2026 में कंपनी के परिचालन राजस्व में ट्रांजैक्शन चार्ज का योगदान 78.65 फीसदी रहा. इसमें इक्विटी ऑप्शंस ट्रेडिंग की महत्वपूर्ण भूमिका रही. ऑप्शंस ट्रेडिंग से मिलने वाला राजस्व परिचालन आय में 60 फीसदी से अधिक योगदान देता था. यह आंकड़ा एक्सचेंज की कमाई में डेरिवेटिव्स कारोबार की बड़ी भूमिका को दर्शाता है.

इक्विटी और डेरिवेटिव्स बाजार में NSE की मजबूत मौजूदगी

एनएसई की प्रमुख बाजार श्रेणियों में मजबूत हिस्सेदारी बनी हुई है. वित्त वर्ष 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, इक्विटी कैश सेगमेंट में एक्सचेंज की बाजार हिस्सेदारी करीब 93 फीसदी रही. वहीं, इक्विटी फ्यूचर्स में इसकी हिस्सेदारी 99.79 फीसदी, प्रीमियम टर्नओवर के आधार पर इक्विटी ऑप्शंस में 74.71 फीसदी और करेंसी फ्यूचर्स में 99.48 फीसदी रही. हालांकि, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में इक्विटी ऑप्शंस बाजार में एनएसई की हिस्सेदारी घटकर 68.48 फीसदी रह गई.

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