UPI Digital Payments India: भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) डिजिटल भुगतान की दुनिया में लगातार नए मुकाम हासिल कर रहा है. देश में यूपीआई के जरिए हर महीने 20 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए जा रहे हैं. बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का यूपीआई इकोसिस्टम इस बात का उदाहरण है कि किस तरह डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना बड़े पैमाने पर विस्तार और वित्तीय समावेशन को एक साथ आगे बढ़ा सकती है.
2030 तक 2.6 ट्रिलियन डॉलर का हो सकता है वैश्विक भुगतान उद्योग
बीसीजी की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक भुगतान उद्योग का राजस्व वर्ष 2030 तक बढ़कर 2.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. हालांकि, आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र की विकास दर कुछ धीमी हो सकती है. रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वैश्विक भुगतान उद्योग की वृद्धि दर लगभग 5 प्रतिशत सालाना रह सकती है, जबकि पिछले पांच वर्षों के दौरान यह करीब 7 प्रतिशत रही थी.
वित्तीय समावेशन में भारत के यूपीआई की अहम भूमिका
बीसीजी के प्रबंध निदेशक और भागीदार विवेक मंधाता ने कहा कि भारत का रियल-टाइम पेमेंट इकोसिस्टम डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक है. उनके मुताबिक, भारत ने वित्तीय समावेशन और बड़े पैमाने पर डिजिटल भुगतान के इस्तेमाल के बीच संतुलन स्थापित किया है. यह मॉडल दुनिया के कई देशों के लिए अध्ययन का विषय बन सकता है. उन्होंने कहा कि यूपीआई के जरिए भारत ने करोड़ों लोगों को डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जोड़ा है. इसके बावजूद लेनदेन की वृद्धि दर मजबूत बनी हुई है. इससे देश में डिजिटल भुगतान की बढ़ती स्वीकार्यता और उपयोग का पता चलता है.
ऑनलाइन भुगतान में बढ़ रहा क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में क्रेडिट कार्ड का उपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है. खासतौर पर ऑनलाइन भुगतान के क्षेत्र में इसकी मांग में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. इससे बैंकों, फिनटेक कंपनियों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए नई संभावनाएं पैदा हो रही हैं. ये कंपनियां ग्राहकों की जरूरतों के मुताबिक मूल्य वर्धित सेवाएं विकसित कर सकती हैं. बीसीजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के डिजिटल भुगतान बाजार का अगला चरण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एजेंटिक कॉमर्स से जुड़ा हो सकता है.
भविष्य में एआई आधारित सिस्टम भुगतान प्रक्रिया को अधिक सहज, सुरक्षित और स्वचालित बनाने में मदद कर सकते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, एआई भुगतान और ट्रांजैक्शन बैंकिंग क्षेत्र में तेजी से बदलाव ला रहा है. इसकी मदद से कंपनियों को लागत कम करने और अपने उत्पादों में सुधार करने के अवसर मिल रहे हैं. इसके अलावा ट्रेड फाइनेंस और भुगतान संचालन जैसी पारंपरिक कागजी प्रक्रियाओं को भी स्वचालित किया जा सकता है.
एजेंटिक कॉमर्स के कारण भुगतान सेवा प्रदाताओं के सामने नई चुनौती
रिपोर्ट में शामिल सर्वेक्षण के अनुसार, 73 प्रतिशत बड़े व्यापारियों ने संकेत दिया कि यदि उन्हें एजेंट आधारित लेनदेन के लिए बेहतर सुविधा और समर्थन मिलता है, तो वे अपने मौजूदा भुगतान सेवा प्रदाताओं को बदलने पर विचार कर सकते हैं. यह संकेत देता है कि एजेंटिक कॉमर्स भुगतान उद्योग में प्रतिस्पर्धा का एक महत्वपूर्ण कारक बनता जा रहा है. भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए नई तकनीकों को अपनाना और व्यापारियों की बदलती जरूरतों के अनुसार सेवाएं उपलब्ध कराना अहम हो सकता है.
137 देशों में उपलब्ध हैं इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम
बीसीजी के अध्ययन में भुगतान संप्रभुता के बढ़ते महत्व का भी उल्लेख किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में दुनिया के 137 देशों में चौबीसों घंटे इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम उपलब्ध हैं. इससे वैश्विक भुगतान व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक विविध और व्यापक होती जा रही है. भारत का यूपीआई इसी बदलाव का एक प्रमुख उदाहरण है, जहां डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के जरिए बड़े पैमाने पर लेनदेन संभव हो रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में एआई और एजेंटिक कॉमर्स जैसी तकनीकें भुगतान क्षेत्र के विकास और प्रतिस्पर्धा को नई दिशा दे सकती हैं.
यह भी पढ़े: जमशेदपुर में वारदातः गन प्वाइंट पर दिनदहाड़े बैंक में 42 लाख की लूट, फरार हुए बदमाश

