New Delhi: भारत चीन सीमा से लगते क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के काम को रफ्तार दे रहा है. अरुणाचल से लेकर लेह-लद्दाख तक ऑल वेदर रोड नेटवर्क का जाल बिछाने का काम चल रहा है. इसी क्रम में भारत ने सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील पूर्वी लद्दाख में श्योक नदी के किनारे-किनारे दौलत बेग ओल्डी तक नया रोड कॉरिडोर बनाने की योजना बनाई है. दौलत बेग ओल्डी इंडियन आर्मी का महत्वपूर्ण बेस है. लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के करीब होने की वजह से इसका महत्व काफी बढ़ जाता है. नया रोड कॉरिडोर 150 किलोमीटर लंबा होगा.
कॉरिडोर डेवलप करने की योजना तैयार
भारत पूर्वी लद्दाख के सामरिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में एक और प्रमुख रोड कॉरिडोर डेवलप करने की योजना तैयार कर रहा है. सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने श्योक नदी के पूर्वी तट के साथ दौलत बेग ओल्डी की ओर 150 किलोमीटर लंबी सड़क के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है. प्रस्तावित सड़क 150 किलोमीटर लंबी होगी और इसे 5 पैकेज में बांटा गया है. यह परियोजना दरबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी सड़क नेटवर्क का हिस्सा है और इसे राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (एनएचडीएल) के मानकों के अनुरूप विकसित करने का प्रस्ताव है.
महत्वपूर्ण देपसांग का मैदानी इलाका शामिल
प्रस्तावित सड़क की भौगोलिक स्थिति इसे काफी सामरिक महत्व प्रदान करती है. दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) पूर्वी लद्दाख के सब-सेक्टर नॉर्थ में स्थित है. यह चीन के साथ लगते एलएसी के करीब है. इस क्षेत्र में सामरिक रूप से महत्वपूर्ण देपसांग का मैदानी इलाका शामिल है और यह काराकोरम दर्रे के भी निकट है. मौजूदा दरबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी सड़क ने लद्दाख के सबसे उत्तरी क्षेत्रों तक सैनिकों और रसद सामग्री पहुंचाने की भारत की क्षमता को पहले ही बदल दिया है.
सड़क परिवहन की क्षमता बढ़ सकती है
श्योक नदी के पूर्वी तट के साथ नया मार्ग बनने से सड़क परिवहन की क्षमता बढ़ सकती है. साथ ही ऐसे क्षेत्र में एक वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध हो सकता है, जहां रसद और आवाजाही बेहद महत्वपूर्ण हैं. इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में सामने आ सकता है. पूर्वी लद्दाख के ऊंचाई वाले दुर्गम भूभाग में सड़कें अचानक आने वाली बाढ़, ग्लेशियरों के पिघलने, भूस्खलन और खराब मौसम के कारण प्रभावित हो सकती हैं. ऐसे में एक अतिरिक्त सड़क मार्ग उपलब्ध होने से मौजूदा मार्ग के किसी हिस्से के बाधित होने पर आवाजाही के लिए अधिक विकल्प मिल सकते हैं.
निर्माण इंजीनियरिंग के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण
हालांकि, इस सड़क का निर्माण इंजीनियरिंग के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण होगा. श्योक नदी लद्दाख के सबसे दुर्गम भूभागों में से होकर बहती है. इस क्षेत्र में अत्यधिक ऊंचाई, भीषण सर्दी और गर्मियों के दौरान बर्फ तथा ग्लेशियरों के पिघलने के कारण नदी के जल प्रवाह में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है. इसलिए नदी के किनारे सड़क का निर्माण और रखरखाव करने के लिए व्यापक सुरक्षा कार्यों, पुलों और विशेष इंजीनियरिंग तकनीकों की जरूरत होगी.
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