CM Yogi: शनिवार को छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर को लेकर चुटकी ली. उन्होंने कहा कि अगर राजभर को समय पर छात्रवृत्ति मिल जाती तो वह भी पढ़-लिखकर होनहार बनते और शायद नेता नहीं बनते. सीएम ने कहा कि उस समय की सरकार ने छात्रवृत्ति नहीं दी, इसलिए राजभर पढ़ नहीं पाए. उन्होंने मेहनत और संघर्ष किया, जनता की आवाज बनकर लड़ते रहे और बाद में मंत्री बने. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राजभर ने थ्री व्हीलर और टैक्सी भी चलाई है.
इससे पहले मुख्यमंत्री ने लोक भवन में 4.60 लाख से अधिक विद्यार्थियों के बैंक खातों में 148 करोड़ रुपये से ज्यादा की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि का अंतरण किया. इस चरण में ओबीसी के 2,23,615 विद्यार्थियों को 60.01 करोड़, अनुसूचित जाति के 1,59,959 विद्यार्थियों को 64.54 करोड़, सामान्य वर्ग के 38,084 विद्यार्थियों को 11.43 करोड़ और अल्पसंख्यक वर्ग के 38,901 विद्यार्थियों को 12.06 करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं.
सीएम योगी ने कहा कि पिछले साल 69 लाख विद्यार्थियों को 6200 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी गई. उनके अनुसार, पिछले नौ वर्षों में चार करोड़ से अधिक बच्चों को छात्रवृत्ति का लाभ दिया गया है. उन्होंने मंत्री संजीव कुमार गोंड, असीम अरुण, दानिश आजाद और नरेंद्र कश्यप का उदाहरण देते हुए कहा कि ईमानदारी से प्रयास करने पर परिणाम भी मिलता है.
2017 से पहले की व्यवस्था पर सवाल
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि 2017 से पहले अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों की छात्रवृत्ति समय पर नहीं भेजी जाती थी. उन्होंने कहा कि उनके संज्ञान में मामला आने के बाद दो वर्षों की छात्रवृत्ति एक साथ दी गई. सीएम योगी ने कहा कि सरकार की नीयत साफ हो तो छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं.
हर महीने समय पर पहुंचे छात्रवृत्तिः सीएम योगी
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कोई पात्र बच्चा छात्रवृत्ति से वंचित न रहे. उन्होंने कहा कि अप्रैल से जुलाई के बीच प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र विद्यार्थियों के खातों में छात्रवृत्ति भेजने की व्यवस्था की गई है. समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को हर महीने भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.
योगी ने बताया कि एससी-एसटी छात्रों की जानकारी की समीक्षा में करीब चार लाख बच्चों का डाटा फीड नहीं मिला था. इसके बाद उनके लिए पोर्टल शुरू कराया गया. सरकार के मुताबिक, छात्रवृत्ति वितरण की प्रक्रिया को ऑटोमेशन से जोड़ा गया है, जिससे भुगतान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने का प्रयास किया गया है.

