06 October 2026 Ka Panchang: मंगलवार का पंचांग, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

Shivam
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06 October 2026 Ka Panchang: 6 अक्टूबर को आश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि और मंगलवार का दिन है. इस दिन पितृ पक्ष की एकादशी होने के कारण धार्मिक दृष्टि से इसका विशेष महत्व माना जाता है. मंगलवार को इंदिरा एकादशी का व्रत रखा जाएगा और एकादशी तिथि वालों का श्राद्ध भी किया जाएगा. एकादशी तिथि रात 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगी. वहीं 6 अक्टूबर को साध्य योग पूरे दिन और रात को पार करते हुए 7 अक्टूबर यानी बुधवार सुबह 5 बजे तक रहेगा. अश्लेषा नक्षत्र मंगलवार रात 10 बजकर 18 मिनट तक रहेगा. आइए जानते हैं 6 अक्टूबर का पंचांग, एकादशी श्राद्ध का शुभ मुहूर्त, राहुकाल और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय…

6 अक्टूबर 2026 का पंचांग

  • आश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि – 6 अक्टूबर 2026 को रात 12 बजकर 35 मिनट तक
  • साध्य योग – 6 अक्टूबर को पूरे दिन और रात के बाद 7 अक्टूबर की सुबह 5 बजे तक
  • अश्लेषा नक्षत्र – 6 अक्टूबर को रात 10 बजकर 18 मिनट तक
  • विशेष – एकादशी तिथि श्राद्ध और इंदिरा एकादशी व्रत

6 अक्टूबर को एकादशी तिथि श्राद्ध का मुहूर्त

  • कुतुप मुहूर्त – सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक
  • रौहिण मुहूर्त – दोपहर 12:36 बजे से 1:24 बजे तक
  • अपराह्न काल – दोपहर 1:24 बजे से 3:48 बजे तक

6 अक्टूबर को राहुकाल का समय

  1. दिल्ली – दोपहर बाद 3:05 बजे से शाम 4:33 बजे तक
  2. मुंबई – दोपहर बाद 3:25 बजे से शाम 4:54 बजे तक
  3. चंडीगढ़ – दोपहर बाद 3:07 बजे से शाम 4:34 बजे तक
  4. लखनऊ – दोपहर 2:51 बजे से शाम 4:19 बजे तक
  5. भोपाल – दोपहर बाद 3:05 बजे से शाम 4:34 बजे तक
  6. कोलकाता – दोपहर 2:22 बजे से दोपहर बाद 3:51 बजे तक
  7. अहमदाबाद – दोपहर बाद 3:25 बजे से शाम 4:53 बजे तक
  8. चेन्नई – दोपहर 2:56 बजे से शाम 4:26 बजे तक

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

  • सूर्योदय – सुबह 6:16 बजे
  • सूर्यास्त – शाम 6:01 बजे

इंदिरा एकादशी व्रत का महत्व

आश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस दिन विधि-विधान से व्रत करने का विधान है. पितृ पक्ष के दौरान पड़ने के कारण इंदिरा एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यदि किसी पूर्वज को उनके कर्मों के कारण यमराज के यहां दंड भोगना पड़ रहा हो, तो इंदिरा एकादशी का व्रत करके उसके पुण्य को पूर्वज के नाम पर समर्पित करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई सामान्य मान्यताओं और ज्योतिष गणनाओं पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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