New Delhi: जर्मनी के बावारिया राज्य के ऐतिहासिक शहर ऑग्सबर्ग में एक ऐसी जादुई और रहस्यमयी सोसाइटी बसी है, जिसका नाम फुगेराई है. इसे दुनिया का सबसे पहला और सबसे पुराना सोशल हाउसिंग कॉम्प्लेक्स माना जाता है. 16वीं से लेकर आज 21वीं सदी तक इस सोसाइटी में रहने वाले लोग साल भर का किराया महज 1 राइनीशर गुल्डेन देते हैं, जो आज के समय में महज 80 से 85 रुपये के बराबर है. इस ऐतिहासिक दास्तान की शुरुआत 15वीं और 16वीं सदी के सबसे बड़े व्यापारी घराने फुगर परिवार से होती है.
‘जैकब द रिच’ कहकर बुलाते थे
इस परिवार के प्रमुख जैकब फुगर इतने अमीर थे कि लोग उन्हें ‘जैकब द रिच’ कहकर बुलाते थे. आज के फाइनेंसियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि जैकब फुगर इतिहास के सबसे अमीर इंसान थे, जिनकी कुल संपत्ति आज के मूल्य के हिसाब से 512 बिलियन अमेरिकी डॉलर से भी ज्यादा थी, जो एलॉन मस्क से दोगुनी थी, तो जेफ बोजोस से 60 प्रतिशत ज्यादा थी. तांबे के व्यापार से लेकर बैंकों और खदानों पर अपना एकछत्र राज कायम करने वाले जैकब ने साल 1514 में अपनी अटूट संपत्ति का एक हिस्सा गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए दान करने का फैसला किया.
अनोखी कॉलोनी का निर्माण कराया
इसी सोच के साथ 1514 से 1523 के बीच फुगेराई नाम की इस चारदीवारी से घिरी अनोखी कॉलोनी का निर्माण कराया गया. जैकब फुगर एक धार्मिक कैथोलिक इंसान थे. उन्होंने इस परिसर को उन मेहनती, ईमानदार, लेकिन आर्थिक रूप से पिछड़े कैथोलिक नागरिकों के लिए बनवाया था, जो अपनी किसी गलती के बिना गरीबी का शिकार हो गए थे. उन्होंने नियम बनाया कि इस जगह का किराया कभी नहीं बदलेगा और 500 सालों के लंबे अंतराल के बाद भी उनके वंशज इस नियम का पूरी निष्ठा से पालन कर रहे हैं.
यह किराया महज एक प्रतीकात्मक शुल्क
हालांकि, फुगर के जमाने में भी यह किराया महज एक प्रतीकात्मक शुल्क था. इसके बदले में संस्थापक की केवल एक ही शर्त थी कि यहां रहने वाला हर निवासी दिन में तीन बार जैकब फुगर और उनके परिवार के लिए प्रार्थना करेगा. आज भी फुगेराई में रहने के लिए वही 500 साल पुराने तीनों नियम लागू हैं, जिसमें इंसान का कैथोलिक होना अनिवार्य है, वह कम से कम 2 साल से ऑग्सबर्ग का निवासी हो और उस पर कोई कर्ज न हो.
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