Islamabad: पाकिस्तान में सेना की बढ़ती ताकत और सरकार के फैसलों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. विपक्षी नेता और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने सेना पर तीखा हमला बोला. रहमान ने सत्ता में बैठे लोगों पर देश को अपनी प्रॉपर्टी की तरह चलाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के संसाधन और संस्थान वहां की जनता के हैं, किसी परिवार या ताकतवर समूह के नहीं. पाकिस्तान तुम्हारे परिवार की जागीर नहीं है.
जरूरत से ज्यादा ताकत रखना पड़ सकता है भारी
उनका आरोप है कि मिलिट्री लीडरशिप और सत्ताधारी गठबंधन देश के भविष्य से जुड़े फैसले जनता और राजनीतिक दलों को भरोसे में लिए बिना कर रहे हैं. सैन्य नेतृत्व को 1971 में ढाका में मिली हार की याद दिलाते हुए चेतावनी दी है कि जरूरत से ज्यादा ताकत अपने हाथ में रखना आखिरकार भारी पड़ सकता है. उन्होंने आरोप लगाया कि देश में जनता के अधिकारों, प्रांतों की आजादी और लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है.
मुनीर के हाथों में बढ़ती ताकत पर भी सवाल
फजलुर रहमान ने सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के हाथों में बढ़ती ताकत पर भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि पाकिस्तान को चलाने का फैसला सिर्फ ताकतवर लोगों को नहीं करना चाहिए, बल्कि इसमें जनता और राजनीतिक दलों की भी अहम भूमिका होनी चाहिए. फजलुर रहमान ने कहा कि अगर सरकार और सेना राजनीतिक दलों से सहयोग चाहती हैं, तो उन्हें भी लोगों के अधिकारों और उनकी आवाज का सम्मान करना होगा. उन्होंने राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ हो रहे व्यवहार पर भी नाराजगी जताई.
मेरे कार्यकर्ता मारे जाते हैं तो आप मुस्कुराते हैं
फजलुर रहमान ने कहा कि जब सैनिक शहीद होते हैं तो मैं रोता हूं, लेकिन जब मेरे कार्यकर्ता मारे जाते हैं तो आप मुस्कुराते हैं. इस बयान के जरिए उन्होंने सुरक्षा बलों के जवानों की कुर्बानी और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ कथित भेदभाव को लेकर सवाल उठाए. फजलुर रहमान ने अपनी बात रखते हुए दिसंबर 1971 की उस घटना को याद किया, जब पाकिस्तानी सेना ने भारत के सामने सरेंडर किय था. इसी के बाद बांग्लादेश एक अलग देश बना.
खैबर पख्तूनख्वा को लेकर केंद्र और विपक्ष के बीच टकराव
फजलुर रहमान की नाराजगी ऐसे समय सामने आई है, जब पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा राज्य को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ गया है. इस प्रांत में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की सरकार थी. लेकिन 11 अक्तूबर को पाकिस्तान की केंद्र सरकार ने यहां इमरजेंसी लगा दी है. राज्य सरकार भंग हो चुकी है.
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