Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है. इसे कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. इस बार शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है. इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. इस बार शरद पूर्णिमा पर हर्षण योग और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे शुभ योग बनने की बात कही जा रही है, जिससे इस पर्व का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है.
शरद पूर्णिमा पर कौन-कौन से शुभ योग बन रहे हैं?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा पर हर्षण योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग पूजा-पाठ, मंत्र जाप और दान-पुण्य के लिए शुभ माना जाता है. सर्वार्थ सिद्धि योग को कई शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल माना जाता है. वहीं, हर्षण योग को प्रसन्नता और उत्साह से जोड़कर देखा जाता है. इस बार शरद पूर्णिमा को 30 साल बाद बन रहे दुर्लभ शुभ संयोगों से जोड़कर भी देखा जा रहा है. हालांकि, इन संयोगों की पुष्टि के लिए पंचांग के अनुसार सटीक तिथि और समय का मिलान करना जरूरी है.
कोजागरी पूर्णिमा पर क्यों होती है मां लक्ष्मी की पूजा?
धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और देखती हैं कि कौन जागकर उनकी आराधना कर रहा है. इसी मान्यता से इस पर्व का नाम कोजागरी पूर्णिमा पड़ा है. ‘कोजागरी’ शब्द का अर्थ है- ‘कौन जाग रहा है’. इस दिन श्रद्धालु मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करके घर में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं. कई स्थानों पर रात में जागरण, भजन-कीर्तन और मंत्र जाप भी किया जाता है.
शरद पूर्णिमा की रात चांदनी में क्यों रखी जाती है खीर?
शरद पूर्णिमा पर दूध और चावल से खीर बनाने और उसे रात में चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस रात चंद्रमा की किरणें अमृत के समान मानी जाती हैं. इसी विश्वास के चलते खीर को चांदनी में रखा जाता है और अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है. हालांकि, चांदनी में रखी खीर के औषधीय लाभ या चंद्रमा की किरणों के अमृत समान होने की मान्यता को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए.
शरद पूर्णिमा पर कैसे करें मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा?
शरद पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें. इसके बाद मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करें. शाम को चंद्रमा के दर्शन करके अर्घ्य दें और खीर का भोग लगाएं. अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्य जरूरी वस्तुओं का दान करें. धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा पर श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है.

