New York: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में महिला, शांति और सुरक्षा (डब्ल्यूपीएस) एजेंडे पर आयोजित खुली बहस में भारत ने दक्षिण सूडान में तैनात अपने दो शांति सैनिकों की पहलों का उल्लेख किया. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी, नेतृत्व में उनकी भूमिका और सशस्त्र बलों में उनकी हिस्सेदारी बढ़ाना शांति एवं सुरक्षा प्रयासों को मजबूत बनाने के लिए महत्वपूर्ण है.
समर्थन खत्म करने की जरूरत पर जोर
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में महिला, शांति और सुरक्षा (डब्ल्यूपीएस) एजेंडे के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संघर्षों को संवाद और कूटनीति के जरिए समाप्त करने तथा संघर्षों से लाभ उठाने वाले सरकारी और गैर-सरकारी तत्वों को मिलने वाला समर्थन खत्म करने की जरूरत पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन (यूएनएमआईएसएस) में तैनात भारतीय सेना के मेजर मोइज यासीन ने एक सुलभ, गोपनीय और ‘पीड़ित-केंद्रित शिकायत तंत्र’ विकसित किया है, जबकि मेजर सोनिया नेवास्कर ने रोकथाम के लिए ‘सर्वोत्तम-प्रथा नेटवर्क’ स्थापित किया है.
सुरक्षा संबंधी प्रयासों को मजबूत बनाने के लिए महत्वपूर्ण
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में डब्ल्यूपीएस एजेंडे पर आयोजित खुली बहस में पी हरीश ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना, नेतृत्व में उनकी हिस्सेदारी सुनिश्चित करना और सशस्त्र बलों में उनकी भूमिका का विस्तार करना शांति एवं सुरक्षा संबंधी प्रयासों को मजबूत बनाने के लिए महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि महिला, शांति और सुरक्षा एजेंडे को वास्तव में लागू करने के लिए केवल नीतिगत घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं. इसके लिए संघर्षों के मूल कारणों को दूर करना और ऐसे तत्वों को मिलने वाला समर्थन समाप्त करना आवश्यक है, जो संघर्ष जारी रहने से लाभ उठाते हैं.
प्रौद्योगिकी की भूमिका पर भी प्रकाश डाला
बहस के दौरान भारत ने राजनीति और नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए लैंगिक कोटा व्यवस्था के महत्व को भी रेखांकित किया. इस संदर्भ में भारत के नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 का उल्लेख करते हुए इसे महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया. उन्होंने महिला, शांति और सुरक्षा एजेंडे को आगे बढ़ाने में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर भी प्रकाश डाला.
तकनीक की भूमिका भी महत्वपूर्ण
उन्होंने महिला, शांति और सुरक्षा एजेंडे को आगे बढ़ाने में तकनीक की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया. उनके अनुसार, तकनीक का उपयोग संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में शुरुआती चेतावनी देने, महिलाओं के साथ डिजिटल माध्यम से परामर्श करने और हिंसा से प्रभावित लोगों की जरूरतों के अनुरूप सहायता व्यवस्था विकसित करने में किया जा सकता है.
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