UP: हिंसा करने वालों को नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी? योगी सरकार ने बदले कैरेक्टर सर्टिफिकेट के नियम

Ved Prakash Sharma
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Job Rules In UP:  उत्तर प्रदेश में आवेदकों के चरित्र सत्यापन को लेकर नीति और सख्त की गई है, जिसमें बताया गया है कि राजनीतिक विचारधारा के आधार पर ही किसी को अयोग्य नहीं माना जाएगा, लेकिन किसी भी तरह के हिंसक प्रदर्शन में हिस्सा लेने पर सरकारी नौकरी मिलने में परेशानियां आ सकती है. इस तरह से अब उत्तर प्रदेश में जो प्रदर्शन या फिर किसी हिंसक आंदोलन में शामिल होंगे, उन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी. यूपी सरकार के इस आदेश में कहा गया है कि यूपी में किसी भी प्रदर्शन में शामिल होकर उसमें किसी भी तरह की हिंसा हुई तो ऐसे अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी नहीं दी जाएगी.

ऑर्डर में लिखा प्वाइंट

*यूपी में आंदोलन में शामिल होने  के लिए हिंसा की तो सरकारी नौकरी से होंगे दूर.

*सरकारी नौकरी के लिए आवेदकों के चरित्र सत्यापन को लेकर नीति और सख्त कर दी है.

*नए नियम के तहत यूपी के सरकारी विभागों, निगमों, परिषद और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती के तहत चयन में चरित्र सत्यापन पर सख्ती की गई है.

*राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी को नहीं माना जाएगा अयोग्य.

*नियुक्ति विभाग के प्रमुख सचिव एम देवराज की ओर से जारी किया गया निर्देश.

*केवल एफआईआर दर्ज होने या जांच लंबित रहने से अभ्यर्थी स्वतः अयोग्य नहीं माना जायेगा.

*पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों का नहीं होगा सत्यापन.

*पिछले विभाग से ली जा सकती है जानकारी, पुलिस को 30 दिन के अंदर देनी होगी सत्यापन रिपोर्ट.

क्या कहा गया है ऑर्डर में?

उपरोक्त प्रस्तरों में किसी बात के होते हुए भी किसी व्यक्ति को मात्र उसकी राजनीतिक विचारधारा के कारण नियुक्ति के लिए अनुपयुक्त नहीं माना जाएगा, किन्तु ऐसे व्यक्ति जो किसी ऐसे संगठन के सदस्य हैं, जिसका संकल्पित उद्देश्य हिंसात्मक रीति से समाज की विद्यमान व्यवस्था को बदलना है, सरकार के अधीन नियुक्ति के लिए अपात्र समझे जायेंगे. इक्कीस वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने के बाद और जांच के दिनांक से तीन वर्ष के भीतर किसी भी ऐसी गतिविधि में भाग लेने को इस बात का प्रमाण माना जाएगा कि वह व्यक्ति अभी भी ऐसी गतिविधियों में सक्रिय रूप से संलग्न है, जब तक कि समय के इस अन्तराल में उसकी प्रवृत्ति में परिवर्तन के सकारात्मक (ठोस) प्रमाण उपलब्ध न हो.

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