ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अपनी सेना को खुली छूट दी है कि यदि अमेरिका-इजरायल हमला करते हैं तो सेना युद्ध की सीमा और शर्तें खुद तय कर सकता है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वाशिंगटन को ईरान के साथ अपना युद्ध खत्म करने की कोई जल्दी नहीं है. यह संघर्ष “कोई आम युद्ध नहीं” है, महीनों की लड़ाई और बार-बार की राजनयिक कोशिशों के बावजूद कोई स्थायी समाधान न निकलने के बाद भी, समय अमेरिका के पक्ष में है.
संघर्ष में वाशिंगटन का वित्तीय खर्च बहुत कम
अमेरिकी नेता ने इस अभियान की आर्थिक लागत को भी कम करके बताया और जोर देकर कहा कि इस संघर्ष में वाशिंगटन का वित्तीय खर्च बहुत कम है. उन्होंने कहा कि “कुल मिलाकर देखा जाए तो हम बहुत कम पैसा खर्च कर रहे हैं. मैंने किसी को कहते सुना कि आप पैसे खर्च कर रहे हैं. मैंने कहा कि हमने जो भी पैसा खर्च किया है, उसकी भरपाई हमने वेनेजुएला जैसी जगह से कई गुना ज्यादा कर ली है… लगभग 10 गुना…”
पहले कहा था-कर सकते हैं हमला
ट्रंप ले इस बात पर भी जोर दिया कि वाशिंगटन के पास राजनयिक प्रयासों के लिए पर्याप्त समय है, भले ही वे अक्सर ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य कार्रवाई की संभावना का जिक्र करते रहते हैं. इससे पहले, उन्होंने कहा था कि अमेरिका “एक और छोटी ‘एपिक फ्यूरी’” (सैन्य कार्रवाई) शुरू कर सकता है, जो तेहरान के खिलाफ किए गए शुरुआती सैन्य अभियान की ओर इशारा है. जबकि अलग-अलग मौकों पर उन्होंने यह भी कहा कि एक “बड़ा और अच्छा” समझौता अभी भी हो सकता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति का ये ताजा बयान ऐसे समय में आया हैं जब इस टकराव के आगे बढ़ने की दिशा को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई है. हालांकि ट्रंप ने संकेत दिया है कि तेहरान समझौता चाहता है, लेकिन दोनों पक्ष मुख्य शर्तों पर एकमत नहीं हैं; इनमें खास तौर पर ईरान का परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिका द्वारा लगाई गई नाकेबंदी शामिल हैं.
क्षेत्रीय घटनाक्रम और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा
वहीं, समाधान खोजने के उद्देश्य से की जा रही राजनयिक पहल शुक्रवार को इस वक्त आगे बढ़ी, जब तुर्की के विदेश मंत्री हकन फ़िदान ने अमेरिका में आयोजित G20 मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ औपचारिक बातचीत की. ऐसे में तुर्की मीडिया के अनुसार, इस चर्चा में वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही बातचीत के साथ-साथ क्षेत्रीय घटनाक्रम और द्विपक्षीय संबंधों पर भी चर्चा हुई.
यह बैठक, तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन और ट्रंप के बीच कुछ दिन पहले हुई टेलीफोन पर बातचीत के बाद हुई है. उस बातचीत में अंकारा ने समुद्री मार्गों को लेकर अपनी सतर्कता जताई थी और क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए किए जा रहे राजनयिक प्रयासों का समर्थन किया था.

