Bihar Crime: बिहार में अवैध हथियार और कारतूसों की तस्करी के खिलाफ पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. भोजपुर जिले में पटना एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो उत्तर प्रदेश से भारी मात्रा में कारतूस बिहार पहुंचा रहा था. पुलिस ने आरा-पटना एनएच-922 पर कुल्हड़िया टोल प्लाजा के पास कार्रवाई करते हुए तीन तस्करों को गिरफ्तार किया है. इनके कब्जे से अलग-अलग बोर के करीब 19,200 कारतूस, एक मैगजीन और लोडेड पिस्टल बरामद हुई है.
पुलिस के मुताबिक, आरोपी उत्तर प्रदेश के बदायूं से कारतूसों की खेप लेकर बिहार आ रहे थे. इस खेप को मुजफ्फरपुर, सीवान, सुपौल और दरभंगा समेत उत्तर बिहार के कई जिलों में पहुंचाने की योजना थी. एसटीएफ को पहले ही इस तस्करी की जानकारी मिल गई थी. इसके बाद पुलिस ने आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी और सही मौके पर उन्हें दबोच लिया.
कौन हैं गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी? Bihar Crime
पुलिस ने जिन तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाना क्षेत्र की इन्द्रप्रस्थ कॉलोनी निवासी सारस कुमार, फतेहपुर निवासी लल्टू कुमार और सीवान जिले के जीबी नगर थाना क्षेत्र के माधवपुर गांव के चंदन तिवारी के रूप में हुई है. प्रारंभिक जांच में तीनों के अंतरराज्यीय हथियार और कारतूस तस्करी गिरोह से जुड़े होने की जानकारी मिली है. पुलिस अब इनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाल रही है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं.
गाड़ी की सीट के नीचे छिपाए थे 19 हजार से ज्यादा कारतूस
एसटीएफ को खेप के बिहार पहुंचने (Bihar Crime) की सूचना मिलने के बाद से ही संदिग्ध वाहन की तलाश शुरू कर दी गई थी. जानकारी के मुताबिक, आरोपी रविवार रात वाराणसी में रुके थे. सोमवार सुबह उनके बिहार में प्रवेश करने की खबर मिलते ही पुलिस ने आरा-पटना हाईवे पर घेराबंदी कर दी. सुबह करीब 9 से 10:30 बजे के बीच कुल्हड़िया टोल प्लाजा और मनभावन मोड़ के आसपास पुलिस की संयुक्त टीम ने टाटा हैरियर एसयूवी को रोक लिया. तलाशी के दौरान शुरुआत में कारतूसों का पता नहीं चला, क्योंकि उन्हें गाड़ी की सीटों के नीचे छिपाकर रखा गया था.
इसके बाद एसटीएफ ने वाहन के नट-बोल्ट खोलकर बारीकी से जांच की. इस दौरान अलग-अलग बोर के हजारों कारतूस बरामद हुए. इनमें 7.65 एमएम के कारतूस भी शामिल हैं. इसके अलावा एक मैगजीन और लोडेड पिस्टल भी मिली. इतनी बड़ी बरामदगी की सूचना मिलने पर एसटीएफ के एसपी अंजनी सिंह भी पटना से कोईलवर पहुंचे और आरोपियों से पूछताछ की.
पुलिस को चकमा देकर भागने की कोशिश, दो गाड़ियों को मारी टक्कर
पुलिस की घेराबंदी देखकर आरोपियों ने मौके से भागने की कोशिश की. बताया जा रहा है कि उन्होंने अपनी एसयूवी को पीछे की ओर तेजी से मोड़ा, जिससे पीछे आ रही एक दूसरी टाटा हैरियर से टक्कर हो गई. इसके बाद आगे निकलने के प्रयास में उनकी गाड़ी सामने से आ रही टाटा नेक्सॉन से भी भिड़ गई. इस घटना में दोनों वाहनों को नुकसान पहुंचा. हालांकि, पुलिस टीम ने घेराबंदी बनाए रखी और तीनों आरोपियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया.
मोबाइल और व्हाट्सएप चैट से सामने आएगा तस्करी का पूरा नेटवर्क
इस मामले में पुलिस अब सिर्फ बरामद कारतूसों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सप्लाई नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है. जांच में सामने आया है कि आरोपी सफर के दौरान डिजिटल निगरानी से बचने के लिए मोबाइल फोन और जीपीएस का इस्तेमाल नहीं कर रहे थे. इसके बावजूद एसटीएफ को मिले खुफिया इनपुट के आधार पर उनकी लोकेशन और गतिविधियों का पता चल गया. फिलहाल पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और व्हाट्सएप चैट की जांच कर रही है. जांच एजेंसियां यह पता लगाना चाहती हैं कि बदायूं में इतनी बड़ी मात्रा में कारतूस किससे खरीदे गए थे और बिहार में किन लोगों को इनकी सप्लाई की जानी थी.
इसके साथ ही गिरोह के मुख्य सरगना, कारतूस उपलब्ध कराने वाले सप्लायर और इन्हें खरीदने वाले लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है.
तस्करी गिरोह से जुड़े दूसरे लोगों की तलाश में छापेमारी
सदर एसडीपीओ-2 रंजीत कुमार सिंह के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क से जुड़े शातिर अपराधी हैं. पुलिस अब इस अवैध कारोबार में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने के लिए लगातार छापेमारी कर रही है. जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 19 हजार से ज्यादा कारतूसों की इतनी बड़ी खेप किसके लिए मंगाई गई थी और इसके पीछे नेटवर्क का असली मास्टरमाइंड कौन है. पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ इस तस्करी के पूरे नेटवर्क से जुड़े और भी खुलासे होने की संभावना है.

