पैराग्वे में बैंकिंग संकट से राष्ट्रपति की गई कुर्सी! महाभियोग के बाद सैंटियागो पेना नजरबंद, जानें पूरा मामला

Divya Rai
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Content Writer The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Paraguay President Santiago Pena: दक्षिण अमेरिकी देश पैराग्वे में बैंकिंग संकट ने राजनीतिक व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है. डिजिटल बैंक यूएनो बैंक के बंद होने और लाखों लोगों की जमा-पूंजी फंसने के बाद राष्ट्रपति सैंटियागो पेना को महाभियोग की कार्रवाई के जरिए सत्ता से बाहर कर दिया गया. संसद में उनके खिलाफ प्रस्ताव पारित होने के कुछ ही देर बाद उन्हें गिरफ्तार कर नजरबंद कर दिया गया.

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पेना की अपनी पार्टी के सांसदों ने भी उन्हें पद से हटाने के समर्थन में वोट दिया. राष्ट्रपति पर हितों के टकराव, बैंकिंग नियमन में हस्तक्षेप, पेंशन फंड के धन के अनुचित इस्तेमाल और केंद्रीय बैंक से जुड़े मामलों में अहम जानकारियां छिपाने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं. हालांकि, पेना ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है.

इस्तीफे की पेशकश के बावजूद महाभियोग की कार्रवाई

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, पेना ने गुरुवार को राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी. लेकिन सांसदों ने उनका इस्तीफा स्वीकार करने के बजाय महाभियोग की प्रक्रिया आगे बढ़ाई और उन्हें कदाचार का दोषी ठहराते हुए पद से हटा दिया. इस फैसले के साथ ही उन्हें पूर्व राष्ट्रपति के तौर पर मिलने वाली कानूनी सुरक्षा और आजीवन सीनेट सदस्यता का अधिकार भी गंवाना पड़ा. अब पेना को शनिवार को पूछताछ के लिए पेश होना है. उन पर विश्वासघात, अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग करने तथा सरकारी धन के गलत इस्तेमाल से जुड़े आरोप हैं. अभियोजक सिल्विया मार्गरीटा गोंजालेज वेस्टर ने पूछताछ की जानकारी दी है.

लाखों लोगों की बचत पर संकट Paraguay President Santiago Pena

पैराग्वे में राजनीतिक संकट की सबसे बड़ी वजह यूएनो बैंक का बंद होना है. केंद्रीय बैंक ने इस डिजिटल बैंक को अपने नियंत्रण में ले लिया, जिसके बाद करीब 30 लाख जमाकर्ताओं की बचत और पेंशन की रकम फंस गई. बताया जा रहा है कि इस घटनाक्रम से देश की आधी से ज्यादा आबादी प्रभावित हुई है. अपनी जमा रकम वापस पाने की मांग को लेकर देशभर में लोग सड़कों पर उतर आए हैं. राजधानी असुनसियोन में विरोध प्रदर्शनों का असर सबसे अधिक देखने को मिला है. बैंकिंग संकट अब केवल आर्थिक मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि सरकार के खिलाफ बड़े जनआक्रोश में बदल गया है.

राष्ट्रपति पर सरकारी धन बैंक तक पहुंचाने का आरोप

महाभियोग की कार्यवाही के दौरान आरोप लगाया गया कि पेना ने अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर सरकारी धन यूएनो बैंक तक पहुंचाने में भूमिका निभाई. इसके बदले बैंक की संदिग्ध कर्ज प्रक्रियाओं और उसके मालिकों से जुड़ी कंपनियों के वित्तीय लेनदेन पर नियामक संस्थाओं ने कथित तौर पर सख्ती नहीं दिखाई.

आरोपों में यह भी शामिल है कि राज्य के पेंशन फंड से करीब 355 मिलियन डॉलर यूएनो बैंक में जमा किए गए थे. यह रकम कानून के तहत निर्धारित सीमा से अधिक बताई गई है. इस मामले ने सरकारी वित्तीय संस्थाओं की जवाबदेही और बैंकिंग निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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