AI end of world 2030: क्या साल 2030 में हमारी दुनिया हमेशा-हमेशा के लिए खत्म होने वाली है? क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंसानों की ही सबसे बड़ी दुश्मन बनकर पूरी इंसानियत को मिटा देगी? दरअसल, एंथ्रोपिक के रिसर्चर जैकब कॉक्सन ने हाल ही में एक इंटरव्यू में जब से कहा है कि ‘AI इस दशक के अंत तक इंसानों का खात्मा कर सकता है‘, तब से एक अलग ही बहस शुरू हो गई है. वहीं, इस लेकर अब एक नई भविष्यवाणी सामने आई है. इस बार फ्यूचर दुनिया की सबसे बड़ी AI चिप बनाने वाली कंपनी एनवीडिया (Nvidia) के CEO जेन्सन हुआंग ने प्रेडिक्ट किया है.
क्या 2030 तक खत्म हो जाएगी दुनिया? जानिए AI को लेकर सामने आई इस नई भविष्यवाणी को लेकर क्या कहते है रिसर्चर
AI end of world 2030
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एनवीडिया के बॉस जेन्सन हुआंग से सवाल किया गया कि क्या AI इंसानों के वजूद के लिए कोई कयामत जैसी स्थिति पैदा कर सकता है, तो उन्होंने बिना किसी झिझक के कहा कि ऐसा होने की ‘जीरो परसेंट’ संभावना है. जो लोग आम जनता के बीच इस तरह की खौफनाक भविष्यवाणियां करके डर का माहौल बना रहे हैं, वो बिना किसी ठोस वैज्ञानिक सबूत के हवा-हवाई बातें कर रहे हैं.
हुआंग का मानना है कि इस डर के पीछे कोई तकनीकी या वैज्ञानिक सच्चाई नहीं छिपी है. ये सब या तो राजनीतिक एजेंडे को साधने के लिए किया जा रहा है या फिर कुछ लोग सिर्फ मीडिया की सुर्खियों में बने रहने और पब्लिसिटी बटोरने के लिए ऐसी डरावनी कहानियां गढ़ रहे हैं. उन्होने कहा कि जो लोग तकनीक की गहराई और उसकी बारीकियों को समझते हैं, वो कभी इस तरह की बचकानी और डरावनी बातें नहीं करेंगे.
इतना ही नहीं, हुआंग ने ये तर्क भी दिया कि यदि हम डर के मारे कड़े कानून बनाकर AI की रिसर्च और डेवलपमेंट को रोक देंगे या धीमा कर देंगे, तो इससे किसी का फायदा नहीं होने वाला. उल्टे इससे नए-नए आविष्कारों और खोजों का रास्ता बंद हो जाएगा. जो देश या कंपनियां बिना डरे तेजी से काम कर रही हैं, वो आगे निकल जाएंगी और बाकी लोग पीछे छूट जाएंगे. इसलिए, कंपनियों को अपनी पूरी ताकत के साथ नई टेक्नोलॉजी को विकसित करने में लगे रहना चाहिए और अपनी ग्रोथ की स्पीड को गलती से भी कम नहीं होने देना चाहिए.
जेन्सन हुआंग ने इस बात को बहुत ही जिम्मेदारी के साथ स्पष्ट किया कि ‘फुल स्पीड’ में आगे बढ़ने का समर्थन करने का मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि सुरक्षा और जांच को नजरअंदाज कर दिया जाए. दुनिया की कोई भी जिम्मेदार टेक्नोलॉजी कंपनी तब तक अपने AI प्रोडक्ट को मार्केट में लॉन्च नहीं करेगी, जब तक कि उसकी सुरक्षा, तैयारी और सटीकता की कड़े पैमानों पर पूरी जांच न कर ली जाए. उन्होंने कहा कि ‘सुरक्षा का ध्यान रखना’ और ‘विकास की रफ्तार बढ़ाना’ दो अलग या एक-दूसरे के विरोधी बातें नहीं हैं. ये दोनों चीजें एक साथ बहुत आराम से चल सकती हैं. अगर आपकी कंपनी के अंदरूनी क्वालिटी स्टैंडर्ड्स मजबूत हैं, तो आप पूरी सुरक्षा की गारंटी देते हुए भी बेहद तेज रफ्तार से आगे बढ़ सकते हैं.
जेन्सन हुआंग के इस बयान से एक बात तो पूरी तरह साफ हो गई है कि आने वाले दिनों में AI को लेकर छिड़ी ये जंग और भी दिलचस्प होने वाली है. एक तरफ जहां वाशिंगटन और राजनीतिक गलियारों में नियमों का शिकंजा कसने की बातें हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ हार्डवोयर और टेक इंडस्ट्री के दिग्गज ये साफ कर चुके हैं कि वो किसी काल्पनिक डर के आगे घुटने टेकने वाले नहीं हैं. ऐसे में 2030 तक दुनिया खत्म होने की बातें सिर्फ कहानियों, फिल्मों और पब्लिसिटी स्टंट तक ही सीमित हैं. असल जिंदगी में AI इंसानों की मदद करने, बीमारियों के इलाज खोजने और दुनिया में तरक्की का एक नया इतिहास रचने के लिए पूरी तरह तैयार है.