‘हवा के जिन्न’ का खौफ! होर्मुज में महिलाएं पहनती हैं मूंछों वाला नकाब, पेड़ों पर बने घरों में रहते हैं लोग

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Hormuz Island: दुनिया की सबसे अहम समुद्री गलियारों में गिना जाने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य अक्सर वैश्विक तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर सुर्खियों में रहता है. लेकिन इस जलडमरूमध्य के आसपास बसी दुनिया सिर्फ भू-राजनीति तक सीमित नहीं है— यहां ऐसी रहस्यमयी परंपराएं और मान्यताएं जीवित हैं, जो आधुनिक दौर में भी लोगों की जिंदगी को गहराई से प्रभावित करती हैं. ईरान के दक्षिण में बसे केश्म द्वीप और होर्मुज द्वीप पर कदम रखते ही ऐसा महसूस होता है जैसे आप किसी जादुई और अनदेखी दुनिया में आ गए हों. यहां की जमीन इंद्रधनुषी रंगों से सजी है—लाल, गुलाबी, नारंगी और सुनहरे रंगों की मिट्टी इस जगह को एक अलग ही पहचान देती है. लेकिन इस खूबसूरती के पीछे छिपी मान्यताएं और डर इस क्षेत्र को और भी रहस्यमय बना देते हैं.

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मूंछों वाला नकाब और ‘जार’ हवा का डर

इन द्वीपों की सबसे अनोखी परंपराओं में से एक है महिलाओं द्वारा पहना जाने वाला खास नकाब, जिसे ‘बोरके’ (Borgheh) कहा जाता है. यह नकाब आम पर्दों से बिल्कुल अलग होता है, क्योंकि इसका आकार मूंछों जैसा दिखता है. फोटोग्राफर होदा अफशार के अनुसार, इसके पीछे ‘जार’ (Zār) नाम की एक प्राचीन मान्यता जुड़ी हुई है. स्थानीय लोगों का विश्वास है कि हवाओं में जिन्न या शैतानी आत्माएं मौजूद होती हैं, जो इंसान के शरीर में प्रवेश कर उसे बीमार कर सकती हैं. ‘जार’ नाम की यह हवा खासतौर पर महिलाओं के लिए खतरनाक मानी जाती है. इसलिए महिलाएं यह नकाब पहनती हैं ताकि इन अदृश्य शक्तियों को भ्रमित किया जा सके और वे उन्हें पुरुष समझकर नुकसान न पहुंचाएं.

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पेड़ों पर बसे घर, जमीन से जुड़ा डर

यहां की मान्यताएं सिर्फ पहनावे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रहने के तरीके को भी प्रभावित करती हैं. केश्म द्वीप के कुछ इलाकों में लोग जमीन पर सोने से बचते हैं और पेड़ों पर रहना ज्यादा सुरक्षित मानते हैं. स्थानीय मान्यता के अनुसार, कुछ विशेष पेड़ों के नीचे सोने से शैतानी आत्माएं इंसान को अपने कब्जे में ले सकती हैं. यह डर इतना गहरा है कि लोग अपनी सुरक्षा के लिए पेड़ों की ऊंचाई पर ही ठिकाना बना लेते हैं. यह दृश्य आधुनिक दुनिया के लिए भले ही अजीब लगे, लेकिन यहां के लोगों के लिए यह उनकी सुरक्षा और आस्था से जुड़ा हुआ है.

इतिहास और संस्कृतियों का अनोखा संगम

इन द्वीपों की परंपराएं सिर्फ अंधविश्वास का परिणाम नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे सदियों पुराना इतिहास और सांस्कृतिक मेलजोल भी है. होर्मुज जलडमरूमध्य हमेशा से व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है. यहां अरब, भारतीय, यूरोपीय और अफ्रीकी व्यापारी आते-जाते रहे, जिससे विभिन्न संस्कृतियों का मिश्रण यहां की जीवनशैली में घुल गया. होदा अफशार के अनुसार, यहां के कई निवासियों के पूर्वज अफ्रीका से आए थे, लेकिन सामाजिक कारणों से वे अपनी पहचान को खुलकर व्यक्त नहीं करते. इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि ने यहां की परंपराओं को और भी विविध और जटिल बना दिया है.

इंद्रधनुषी द्वीप और जादुई मिट्टी

होर्मुज द्वीप को ‘इंद्रधनुष द्वीप’ कहा जाता है, क्योंकि यहां की मिट्टी में 70 से अधिक रंग पाए जाते हैं. यहां की लाल मिट्टी, जिसे स्थानीय भाषा में ‘गोलक’ कहा जाता है, सिर्फ देखने में ही नहीं बल्कि उपयोग में भी खास है. इसका इस्तेमाल खाने में मसाले के रूप में और पेंट बनाने में भी किया जाता है. पर्यटकों के लिए यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं लगती, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए यह जमीन आज भी परंपराओं, डर और विश्वास के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है.

खूबसूरती के पीछे छिपी बेचैनी

आज भी यह इलाका सिर्फ अपनी संस्कृति के लिए ही नहीं, बल्कि सैन्य गतिविधियों और वैश्विक तनाव के कारण भी चर्चा में रहता है. एक तरफ यहां की प्राकृतिक सुंदरता और अनोखी परंपराएं हैं, तो दूसरी तरफ युद्ध और अस्थिरता का डर.यही वजह है कि होर्मुज की यह दुनिया जितनी आकर्षक है, उतनी ही रहस्यमयी और अनसुलझी भी—जहां रंगीन मिट्टी के बीच आज भी ‘हवा के जिन्न’ और आस्था का राज कायम है.

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