Pamukkale Turkey: दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं जो अपनी खूबसूरती के साथ-साथ रहस्यों के लिए भी जानी जाती हैं. तुर्की के पश्चिमी हिस्से में स्थित पामुक्कले ऐसी ही एक अद्भुत जगह है, जिसे दुनिया के सबसे अनोखे प्राकृतिक स्थलों में गिना जाता है. यहां सफेद चमकती ट्रैवर्टाइन की सीढ़ियां और गर्म पानी के तालाब यानी थर्मल पूल मौजूद हैं, जिन्हें देखने के लिए हर साल लाखों पर्यटक यहां पहुंचते हैं.
कपास जैसा दिखता है यह प्राकृतिक अजूबा
पामुक्कले की सबसे खास बात यह है कि दूर से देखने पर यह जगह बिल्कुल कपास के ढेर जैसी नजर आती है. इसी वजह से इसे “कॉटन कैसल” यानी कपास का महल कहा जाता है. इसकी सफेद सीढ़ियां और पूल दरअसल प्राकृतिक खनिजों के जमाव से बने हैं, जो इसे बेहद आकर्षक और अलग बनाते हैं.
![]()
कैसे बने ये सफेद ट्रैवर्टाइन पूल
इस क्षेत्र में ज्वालामुखीय गतिविधियों के कारण जमीन के नीचे से गर्म पानी निकलता है. बारिश का पानी धरती की दरारों से नीचे जाकर मैग्मा की गर्मी से गर्म हो जाता है और चूना पत्थर से खनिजों को अपने साथ ले आता है. जब यह पानी सतह पर आता है, तो खनिज जमकर सफेद ट्रैवर्टाइन चट्टानों का निर्माण करते हैं. यही प्रक्रिया हजारों वर्षों से जारी है.
‘नरक का द्वार’ मानी जाती थी यह जगह
पामुक्कले के पास एक गुफा भी है, जहां ज्वालामुखीय गैसों के कारण कार्बन डाइऑक्साइड जमा होती रही. प्राचीन समय में इसे प्लूटो यानी मृत्यु के देवता का द्वार माना जाता था. कहा जाता है कि इस गुफा में प्रवेश करने वाले जानवर या इंसान अक्सर जिंदा नहीं लौटते थे. इसी कारण इसे “नरक का द्वार” भी कहा जाता है.
गर्म पानी और प्राचीन शहर का संगम
यहां के थर्मल पूलों का तापमान 19 से 57 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है. इन पूलों के ठीक ऊपर प्राचीन ग्रीको-रोमन शहर हिएरापोलिस बसा हुआ था, जो दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व का है. इस ऐतिहासिक शहर को यूनेस्को ने 1988 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था. यहां स्थित क्लियोपेट्रा पूल में आज भी लोग प्राचीन खंभों के बीच तैरने का अनुभव लेते हैं.
भूकंप से बदली इस क्षेत्र की संरचना
सातवीं शताब्दी में आए भूकंप ने इस क्षेत्र की भू-संरचना को काफी बदल दिया था. इसके बाद गर्म पानी के झरनों की दिशा बदल गई और ट्रैवर्टाइन के निर्माण की प्रक्रिया तेज हो गई. आज जो संरचना हम देखते हैं, वह काफी हद तक उसी बदलाव का परिणाम है.
नासा ने भी किया अध्ययन
अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने भी इस क्षेत्र का अध्ययन किया है. टेरा सैटेलाइट पर लगे एस्टर सेंसर ने 2021 में यहां की तस्वीरें ली थीं. यह सेंसर पृथ्वी की सतह, तापमान, ज्वालामुखियों और पर्यावरणीय बदलावों को समझने में मदद करता है.
लाखों वर्षों से चल रही प्राकृतिक प्रक्रिया
पामुक्कले में ट्रैवर्टाइन का निर्माण कम से कम 6 लाख वर्षों से जारी है, जो प्लाइस्टोसीन युग से जुड़ा है. हालांकि, अधिकांश सफेद चट्टानों का निर्माण पिछले 50 हजार वर्षों में हुआ है. वैज्ञानिकों के अनुसार, समय के साथ पानी के तापमान में बदलाव आया है, जिससे ट्रैवर्टाइन और टूफा जैसे अलग-अलग खनिज जमाव बने हैं.
प्रकृति और विज्ञान का अनोखा संगम
पामुक्कले केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति और विज्ञान का अद्भुत संगम है. यह जगह दिखाती है कि कैसे हजारों वर्षों में प्राकृतिक प्रक्रियाएं मिलकर एक अनोखी और खूबसूरत संरचना तैयार करती हैं.
यह भी पढ़े: Israel Iran Conflict: इजरायल और US आर्मी बेस पर ईरान का मिसाइल हमला, छह लोग घायल

