Dhaka: बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों और कट्टरपंथी बयानों के बीच धार्मिक मामलों के मंत्री काजी शाह मोफज्जल हुसैन कैकोबाद ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने साफ कहा कि भारत को अपने यहां मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए. यदि भारत सभी समुदायों को बराबरी का अधिकार और सुरक्षा देगा तो उनका सम्मान और बढ़ेगा. यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल और राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर बांग्लादेश में प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.
मंत्री पद से इस्तीफा देने तक को तैयार
कैकोबाद ने यह भी कहा कि अगर बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों यानि हिंदुओं या किसी भी धर्म के लोगों पर अत्याचार हुआ तो वह मंत्री पद से इस्तीफा देने तक को तैयार हैं. ढाका में बांग्लादेश सेक्रेटेरिएट रिपोर्टर्स फोरम (BSRF) के कार्यक्रम में बोलते हुए कैकोबाद ने कहा कि बांग्लादेश में किसी भी समुदाय के खिलाफ अन्याय, हिंसा या उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अगर जरूरत पड़ी तो मैं मंत्रालय छोड़ दूंगा, लेकिन अल्पसंख्यकों के खिलाफ किसी भी प्रकार का जुल्म स्वीकार नहीं करूंगा.
भारत लोकतंत्र को बनाए रखने वाला बड़ा देश
मंत्री ने भारत का जिक्र करते हुए कहा कि वह भारत का सम्मान करते हैं क्योंकि भारत लोकतंत्र को बनाए रखने वाला बड़ा देश है. कुछ कट्टरपंथी संगठनों ने कथित तौर पर चेतावनी दी है कि यदि भारत में मुस्लिमों पर हमला हुआ तो बांग्लादेश में हिंदू भी सुरक्षित नहीं रहेंगे. कट्टरपंथी मौलाना इनायतुल्लाह अब्बासी Inayatullah Abbasi ने कहा कि अगर पश्चिम बंगाल में मुसलमान सुरक्षित नहीं हैं तो बांग्लादेश में हिंदुओं को भी सुरक्षित नहीं रहने दिया जाएगा. अब्बासी इससे पहले भी भारत विरोधी और हिंदू विरोधी बयानों को लेकर विवादों में रहे हैं.
हिंदू समुदाय पर हमलों में तेज वृद्धि
रिपोर्टों के मुताबिक अगस्त 2024 में Sheikh Hasina सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हमलों में तेज वृद्धि हुई. भारतीय विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2024 से फरवरी 2026 के बीच हिंदुओं के खिलाफ 3,100 से अधिक हिंसक घटनाएं दर्ज की गईं. इनमें घरों, दुकानों और मंदिरों पर हमले शामिल हैं. वहीं बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद (Bangladesh Hindu-Buddhist-Christian Unity Council) की रिपोर्ट के अनुसार 4 अगस्त 2024 से 30 जून 2025 के बीच 2,442 सांप्रदायिक घटनाएं दर्ज हुईं. इन मामलों में सामूहिक बलात्कार, संपत्ति कब्जा, जबरन इस्तीफे और धार्मिक उत्पीड़न जैसी घटनाएं शामिल थीं.
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