05 February 2026 Ka Panchang: हिंदू धर्म में किसी भी कार्य को करने से पहले शुभ और अशुभ मुहूर्त देखा जाता है. ज्योतिष हिंदू पंचांग से रोजाना शुभ-अशुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक्षत्र, सूर्य और चंद्र ग्रह की वर्तमान स्थिति के बारे में बताते हैं. आइए काशी के ज्योतिष से जानते हैं 05 फरवरी, दिन गुरुवार का शुभ मुहूर्त, राहुकाल और सूर्योदय-सूर्यास्त के समय के बारे में.
आज का पंचांग
5 फरवरी को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि और गुरुवार का संयोग बन रहा है. चतुर्थी तिथि गुरुवार रात 12 बजकर 23 मिनट तक प्रभावी रहेगी. वहीं सुकर्मा योग 5 फरवरी की रात 12 बजकर 4 मिनट तक रहेगा. इसके साथ ही उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र भी गुरुवार रात 10 बजकर 58 मिनट तक रहेगा. इस दिन संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का व्रत भी रखा जाएगा.
5 फरवरी 2026 का शुभ मुहूर्त
- फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि– 5 फरवरी 2026 को चतुर्थी तिथि आज रात 12 बजकर 23 मिनट तक
- सुकर्मा योग– 5 फरवरी 2026 को रात 12 बजकर 4 मिनट तक
- उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र– 5 फरवरी 2026 को रात 10 बजकर 58 मिनट तक
- 5 फरवरी 2026 व्रत-त्यौहार– संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत
राहुकाल का समय
- दिल्ली- दोपहर पहले 11:13 – 12:35 PM
- मुंबई- दोपहर पहले 11:28 – 12:53 PM
- चंडीगढ़- दोपहर पहले 11:16 – 12:37 PM
- लखनऊ- सुबह 10:58 – 12:21 PM
- भोपाल- दोपहर पहले 11:10 – 12:34 PM
- कोलकाता- सुबह 10:27 – 11:51 PM
- अहमदाबाद- दोपहर पहले 11:30 – 12:53 PM
- चेन्नई- सुबह 10:56 – 12:23 PM
सूर्य और चंद्रमा का समय
- सूर्योदय – 7:09 AM
- सूर्यास्त – 6:12 PM
- चन्द्रोदय – Feb 05 9:39 PM
- चन्द्रास्त – Feb 06 9:42 AM
संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत
चतुर्थी तिथि के दिन भगवान गणेश के निमित्त व्रत रखा जाता है और रात में चंद्रोदय के समय व्रत का पारण किया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, हर महीने के कृष्ण और शुक्ल—दोनों पक्षों की चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश की पूजा का विधान है. अंतर केवल इतना होता है कि कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी कहा जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी के रूप में मनाई जाती है.
कहा जाता है कि जो श्रद्धालु संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का व्रत करता है, उसके जीवन में चल रही परेशानियों का समाधान होता है और सुख-समृद्धि व सौभाग्य में वृद्धि होती है. इस व्रत का पारण चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करने के बाद किया जाता है. इस दिन चंद्रोदय रात 9 बजकर 35 मिनट पर होगा.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और विभिन्न जानकारियों पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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