06 April 2026 Ka Panchang: सोमवार का पंचांग, जानिए शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

06 April 2026 Ka Panchang: हिंदू धर्म में किसी भी कार्य को करने से पहले शुभ और अशुभ मुहूर्त देखा जाता है. ज्योतिष हिंदू पंचांग से रोजाना शुभ अशुभ मुहूर्त राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक्षत्र, सूर्य और चंद्र ग्रह की वर्तमान स्थिति के बारे में बताते हैं. आइए काशी के ज्योतिष से जानते हैं 06 अप्रैल, दिन सोमवार का शुभ मुहूर्त, राहुकाल और सूर्योदय-सूर्यास्त के समय के बारे में…

आज का पंचांग

06 अप्रैल को वैशाख कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि और सोमवार का दिन है. चतुर्थी तिथि सोमवार दोपहर 02:11 मिनट तक रहेगी. 6 अप्रैल को दोपहर बाद 03:25 मिनट तक सिद्धि योग रहेगा। साथ ही सोमवार देर रात 02:57 मिनट तक अनुराधा नक्षत्र रहेगा. इसके अलावा 6 अप्रैल को माता अनुसुइया की जयंती मनाई जाएगी.

6 अप्रैल 2026 का पंचांग

  • वैशाख कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि – 6 अप्रैल 2026 को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट तक
  • सिद्धि योग– 6 अप्रैल को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट तक
  • अनुराधा नक्षत्र- 6 अप्रैल को देर रात 2 बजकर 57 मिनट तक
  • 6 अप्रैल 2026 व्रत-त्यौहार- माता अनुसुइया जयंती

राहुकाल का समय

  • दिल्ली- सुबह 07:40 से सुबह 09:15 तक
  • मुंबई- सुबह 08:02 से सुबह 09:35 तक
  • चंडीगढ़- सुबह 07:41 से सुबह 09:16 तक
  • लखनऊ- सुबह 07:27 से सुबह 09:01 तक
  • भोपाल- सुबह 07:42 से सुबह 09:15 तक
  • कोलकाता- सुबह 06:59 से सुबह 08:32 तक
  • अहमदाबाद- सुबह 08:01 से सुबह 09:35 तक
  • चेन्नई- सुबह 07:34 से सुबह 09:07 तक

सूर्योस्त-सूर्यास्त का समय

  • सूर्योदय- सुबह 6:03 AM
  • सूर्यास्त- शाम 6:41 PM

माता अनुसुइया की जयंती

माता अनुसुइया, महर्षि अत्रि की पत्नी और कर्दम ऋषि तथा देवहूति की पुत्री थीं. उन्हें भारतीय परंपरा में सतीत्व, पतिव्रता धर्म और अटूट भक्ति का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उन्होंने अपने तप, त्याग और पवित्रता के बल पर त्रिदेव — ब्रह्मा, विष्णु और महेश — को बाल रूप में परिवर्तित कर दिया था, जिसके कारण उन्हें ‘त्रिदेवों की माता’ भी कहा जाता है.

माता अनुसुइया से जुड़ा प्रमुख धार्मिक आयोजन उत्तराखंड के चमोली जिले स्थित सती अनुसुइया आश्रम में होता है, जिसे महर्षि अत्रि की तपस्थली माना जाता है. यहां हर वर्ष उनकी जयंती और विशेष मेले का आयोजन बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ किया जाता है. इसके अलावा चित्रकूट सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर भी इस दिन विशेष पूजा-अर्चना होती है.

माता अनुसुइया के जन्मदिवस के अवसर पर महिलाएं व्रत रखकर उनकी और महर्षि अत्रि की पूजा करती हैं. यह व्रत विशेष रूप से पति की लंबी आयु, परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए रखा जाता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत करने से दांपत्य जीवन सुखमय रहता है और घर में खुशहाली बनी रहती है.
इस अवसर पर आश्रमों और मंदिरों में भजन-कीर्तन, धार्मिक अनुष्ठान और मेलों का आयोजन किया जाता है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर माता अनुसुइया की आराधना करते हैं.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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