09 October 2026 Ka Panchang: आश्विन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि और शुक्रवार का दिन है. पितृपक्ष के दौरान आने वाली चतुर्दशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है, जिनका स्वर्गवास किसी भी महीने की कृष्ण या शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हुआ हो. साथ ही अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए लोगों के लिए भी इस दिन श्राद्ध कर्म किया जाता है. चतुर्दशी तिथि 9 अक्टूबर को रात 09:36 मिनट तक रहेगी. इसके साथ ही शुक्रवार को रात 11:21 मिनट तक ब्रह्म योग रहेगा और रात 09:20 मिनट तक उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र रहेगा. आइए जानते हैं 9 अक्टूबर 2026 का पूरा पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय…
9 अक्टूबर 2026 का पंचांग
- आश्विन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि – 9 अक्टूबर 2026 को रात 9 बजकर 36 मिनट तक.
- ब्रह्म योग – 9 अक्टूबर 2026 को रात 11 बजकर 21 मिनट तक.
- उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र – 9 अक्टूबर 2026 को रात 9 बजकर 20 मिनट तक.
- 9 अक्टूबर 2026 विशेष – चतुर्दशी तिथि श्राद्ध.
9 अक्टूबर 2026 के श्राद्ध के शुभ मुहूर्त
- कुतुप मुहूर्त – 11:45 एएम से 12:31 पीएम तक.
- रौहिण मुहूर्त – 12:31 पीएम से 01:18 पीएम तक.
- अपराह्न काल – 01:18 पीएम से 03:38 पीएम तक.
9 अक्टूबर 2026 के अन्य शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त – 04:40 एएम से 05:29 एएम तक.
- प्रातः संध्या – 05:04 एएम से 06:18 एएम तक.
- अभिजित मुहूर्त – 11:45 एएम से 12:31 पीएम तक.
- विजय मुहूर्त – 02:05 पीएम से 02:51 पीएम तक.
- गोधूलि मुहूर्त – 05:58 पीएम से 06:23 पीएम तक.
- सायाह्न संध्या – 05:58 पीएम से 07:12 पीएम तक.
- अमृत काल – 02:07 पीएम से 03:43 पीएम तक.
9 अक्टूबर 2026 का राहुकाल
- दिल्ली – सुबह 10:41 से दोपहर 12:08 बजे तक.
- मुंबई – सुबह 10:57 से दोपहर 12:26 बजे तक.
- चंडीगढ़ – सुबह 10:43 से दोपहर 12:10 बजे तक.
- लखनऊ – सुबह 10:26 से 11:54 बजे तक.
- भोपाल – सुबह 10:39 से दोपहर 12:07 बजे तक.
- कोलकाता – सुबह 09:56 से 11:24 बजे तक.
- अहमदाबाद – सुबह 10:58 से दोपहर 12:27 बजे तक.
- चेन्नई – सुबह 10:27 से 11:56 बजे तक.
9 अक्टूबर 2026 को सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
- सूर्योदय – सुबह 06:17 बजे.
- सूर्यास्त – शाम 05:59 बजे.
चतुर्दशी तिथि वालों का होगा श्राद्ध
9 अक्टूबर को चतुर्दशी तिथि वालों का श्राद्ध किया जाएगा. यानी इस दिन उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है, जिनका स्वर्गवास किसी भी महीने के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हुआ हो. इसके अलावा इस दिन उन लोगों के भी श्राद्ध कर्म पूर्ण किए जाते हैं, जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो. इसमें दुर्घटना या किसी शस्त्र आदि के कारण हुई मृत्यु को भी शामिल किया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, चतुर्दशी तिथि पर विधि-विधान से श्राद्ध करने से व्यक्ति को अज्ञात भय से मुक्ति मिलती है और पितरों की शांति के लिए किए गए कर्मों का विशेष महत्व माना जाता है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई सामान्य मान्यताओं और ज्योतिष गणनाओं पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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