Calendar Vastu Tips: वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में मौजूद हर वस्तु की एक निश्चित दिशा और उससे जुड़ी ऊर्जा होती है. कैलेंडर भले ही हर घर में आम तौर पर लगाया जाता हो, लेकिन अक्सर लोग इसे खाली दीवार देखकर कहीं भी टांग देते हैं. क्या आप जानते हैं कि कैलेंडर सिर्फ तारीख देखने का साधन नहीं है, बल्कि यह समय के प्रवाह और जीवन में प्रगति का प्रतीक भी माना जाता है? वास्तु के अनुसार कैलेंडर का प्रभाव आपके जीवन पर गहराई से पड़ता है.
वास्तु नियमों के विपरीत दिशा में लगाया गया कैलेंडर न सिर्फ आपकी उन्नति में बाधा बन सकता है, बल्कि घर के माहौल में तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी पैदा कर सकता है. आइए जानते हैं कैलेंडर से जुड़े वे 5 महत्वपूर्ण वास्तु नियम, जो आपके भाग्य और जीवन की दिशा बदल सकते हैं.
1. पूरी तरह वर्जित है दक्षिण दिशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार, कैलेंडर को कभी भी दक्षिण दिशा में नहीं लगाना चाहिए. दक्षिण दिशा को ‘ठहराव’ की दिशा माना जाता है और इसके स्वामी यमराज हैं. यदि आप इस दिशा में कैलेंडर लगाते हैं, तो यह परिवार के सदस्यों की उन्नति में रुकावट पैदा कर सकता है. वास्तु मान्यताओं के अनुसार ऐसे में समय आपके अनुकूल नहीं रहता और इसका नकारात्मक प्रभाव घर के मुखिया के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है.
2. ये दिशाएं तरक्की के खोलती हैं द्वार
पूर्व दिशा (East): वास्तु शास्त्र में पूर्व दिशा का संबंध सूर्य देव से माना जाता है, जो नई शुरुआत और उन्नति के प्रतीक हैं. इस दिशा में कैलेंडर लगाने से जीवन में सकारात्मक अवसर बढ़ते हैं और मान-सम्मान में वृद्धि होती है. यहां लाल या गुलाबी रंग का कैलेंडर विशेष रूप से शुभ माना जाता है.
उत्तर दिशा (North): उत्तर दिशा कुबेर देव से जुड़ी मानी जाती है. इस दिशा में कैलेंडर लगाने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और करियर में प्रगति के योग बनते हैं. उत्तर में हरे या नीले रंग के कैलेंडर का उपयोग करना लाभकारी रहता है.
पश्चिम दिशा (West): यदि आपके कार्य लंबे समय से अटके हुए हैं, तो पश्चिम दिशा में कैलेंडर लगाना उपयोगी साबित हो सकता है. मान्यता है कि इससे रुके हुए कामों में गति आती है और प्रयासों को सकारात्मक परिणाम मिलते हैं.
3. मुख्य दरवाजे और दरवाजे के पीछे न लगाएं कैलेंडर
अक्सर जगह बचाने के लिए लोग कैलेंडर को दरवाजे के पीछे टांग देते हैं. वास्तु के अनुसार, यह एक गंभीर दोष माना जाता है. दरवाजे के पीछे कैलेंडर होने का मतलब है कि आप समय से पीछे चल रहे हैं. इसी प्रकार मुख्य प्रवेश द्वार के ठीक सामने भी कैलेंडर लगाने से बचना चाहिए. वास्तु मान्यताओं के अनुसार, वहां से प्रवाहित होने वाली ऊर्जा जब समय चक्र से टकराती है, तो इससे घर के वातावरण में तनाव और असंतुलन पैदा हो सकता है.
4. तुरंत हटाएं पुराने कैलेंडर
नया साल शुरू होते ही पुराने कैलेंडर को घर से विदा कर देना चाहिए. कई लोग पुराने कैलेंडर के ऊपर ही नया कैलेंडर टांग देते हैं या पिछले साल का कैलेंडर दीवार पर लगा रहने देते हैं. वास्तु में इसे ‘रुका हुआ समय’ माना जाता है, जो आपकी पुरानी यादों और असफलताओं को वर्तमान से जोड़े रखता है और भविष्य के रास्ते बंद कर देता है.
5. सोच-समझकर करें चित्रों का चुनाव
कैलेंडर पर अंकित चित्र हमारे अवचेतन मन पर गहरा असर डालते हैं. इसलिए ऐसे कैलेंडर का उपयोग नहीं करना चाहिए, जिनमें हिंसक पशु, युद्ध से जुड़े दृश्य, पतझड़ या उदासी दर्शाने वाली तस्वीरें हों. घर में हमेशा उगते सूर्य, हरियाली, देवी-देवताओं या सकारात्मक भाव दर्शाने वाले चित्रों वाला कैलेंडर लगाना शुभ माना जाता है.

