कासिमाबाद में जयगुरुदेव जनजागरण यात्रा, संत पंकज जी बोले— चरित्र ही मानव जीवन की पूंजी

Shivam
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कासिमाबाद (गाजीपुर): जयगुरुदेव जनजागरण यात्रा के कल 6 जनवरी को कासिमाबाद विकास खण्ड के ग्राम कटया लहंग पहुंचने पर भव्य स्वागत हुआ. आज यहां आयोजित सत्संग समारोह में संत पंकज जी ने अपने प्रवचन में कहा कि परमात्मा ने आपको मनुष्य शरीर देते समय कहा था कि तुमको मनुष्य शरीर इसलिए दिया जा रहा है कि अबकी बार जीते जी प्रभु की प्राप्ति करने वाले किसी संत महात्मा की तलाश करके अपनी जीवात्मा का कल्याण करा लेना.
ऐसे महापुरुष जब धराधाम पर पधारते हैं तो वह अपना परिचय देते हुए कहते हैं— “हम आये वही देश से, जहां तुम्हारा धाम तुमको घर पहुंचावना एक हमारो काम।।” वे कहते हैं कि जीवात्माएं सतनाम रूपी समुद्र की बूंद हैं, उस समुद्र में इस बूंद को मिलाओ. यदि ऐसा नहीं किया तो दुबारा यह मनुष्य शरीर नहीं मिलेगा. महात्मा समझाते हैं कि वह परमात्मा है, वह आपको मिलेगा, जीते जी मिलेगा.
उन्होंने कहा कि हमारे गुरु महाराज परम संत बाबा जयगुरुदेव जी महाराज ने आत्मा-परमात्मा के गूढ़ ज्ञान को प्राप्त करने के लिए सबसे पहले यह जरूरी बताया कि आप मानव धर्म और मानव कर्म को अपनाएं. मानव धर्म क्या है—इंसान, इंसान के काम आए. एक-दूसरे की निःस्वार्थ भाव से सेवा करे. सत्य, दया, अहिंसा, परोपकार आदि गुणों को अपने जीवन में उतारें.
लेकिन आज की दुनिया में जनमानस विषय-विकारों, शराबों, कबाबों, मांस-मदिरा में सुख ढूंढने की कोशिश कर रहा है. चरित्र पतन जैसे कार्यों को अपनाकर यह जनमानस कैसे सुखी हो सकता है. इसलिए पहले अपने चरित्र रूपी धन को इकट्ठा करें. चरित्र ही मानव जीवन की पूंजी है. जो इंसान अपने अखलाक और ईमान को बरकरार रखता है, वही इंसान चरित्रवान है.
दुनियाभर के लड़ाई-झगड़े—पिता-पुत्र में, आदमी-औरत में, घर-परिवार में, मुल्क-मुल्क में—हे नर-नारियों. ये इंसानों के काम नहीं, ये हैवानों के काम हैं. इसलिए सबसे पहले इंसान बनो, महात्माओं के समीप आओ. वे जो भी दया का प्रसाद दें, उसे लेकर अपने निज घर जाओ, जहां न फिर जन्मना है न मरना.
इसीलिए हमारे गुरु महाराज ने आम जनमानस के बीच आवाज लगाई है कि ऐ इंसानों. तुम अपने दीन-ईमान पर वापस आ जाओ और इस मनुष्य मंदिर में बैठकर भगवान का सच्चा भजन करो, जिससे तुम्हारी जीवात्मा नर्कों में जाने से बच जाए. हम मानें या न मानें, संत महात्मा त्रिकालदर्शी होते हैं. वे सब कुछ जानते हैं. अगर हम उनके वचनों को मान लें तो बच जाएंगे. इसलिए अभी वक्त है उस मालिक से सच्ची प्रार्थना करने का, खुदा के सामने अपने गुनाहों की माफी मांगने का.
महाराज जी ने कहा कि अशुद्ध खान-पान के कारण समाज में सामाजिक समरसता का प्रभाव घटता जा रहा है. जब गांव-गांव के लोग शाकाहारी, सदाचारी और नशामुक्त हो जाएंगे, भगवान का भजन करने लगेंगे और आपसी रगड़े-झगड़े समाप्त हो जाएंगे, तब रामराज्य और सतयुग आ जाएगा.उन्होंने सत्संग में आए सभी लोगों का आभार व्यक्त किया और सभी के सुखद जीवन की मंगल कामना की. शांति व्यवस्था में पुलिस प्रशासन का सहयोग रहा.
इस अवसर पर मनोज यादव, मनोज गुप्ता, मनबोध यादव, प्रभाचंद मास्टर, सिद्धनाथ यादव, केशव यादव, अक्षय लाल, सुरेश गुप्ता, सहयोगी संगत बस्ती के रामउजागिर चौधरी, संतराम विश्वकर्मा, जगन्नाथ शर्मा आदि मौजूद रहे. कार्यक्रम के बाद धर्म यात्रा अगले पड़ाव सोनबरसा ब्लाक कासिमाबाद के लिए प्रस्थान कर गई. यहां कल (आज) दोपहर 12 बजे से सत्संग कार्यक्रम आयोजित है.
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