Diwali 2026: दिवाली का पर्व सिर्फ दीप जलाने और खुशियां मनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कई धार्मिक परंपराएं और मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं. इस दिन लोग मां लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए घरों को सजाते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. वहीं, दिवाली की रात को लेकर कुछ ऐसी मान्यताएं भी प्रचलित हैं, जिनका पालन आज भी कई परिवार करते हैं. इन्हीं में एक मान्यता चौराहों से जुड़ी है. कहा जाता है कि दिवाली की रात खासकर आधी रात के बाद चौराहे पर पड़ी किसी अनजान चीज को लांघना या उसे छूना नहीं चाहिए.
इस मान्यता के चलते लोगों को रात के समय चौराहों से गुजरते हुए सतर्क रहने की सलाह दी जाती है. इस विषय पर उज्जैन के पंडित एवं ज्योतिषाचार्य मनीष शर्मा ने धार्मिक और तांत्रिक परंपराओं से जुड़ी कुछ अहम बातें बताई हैं. उनके अनुसार, दिवाली की रात कई लोग रिश्तेदारों और परिचितों से मिलने के लिए घर से बाहर निकलते हैं. ऐसे में रास्ते में किसी अनुष्ठान से जुड़ी वस्तु पर अनजाने में पैर पड़ने की आशंका रहती है. आखिर चौराहों को लेकर ऐसी मान्यता क्यों है और दिवाली की रात इनका क्या महत्व माना जाता है? आइए समझते हैं.
धार्मिक मान्यताओं में क्यों खास है चौराहा? Diwali 2026
हिंदू धर्म और वास्तु से जुड़ी (Diwali 2026) परंपराओं में चौराहे को एक विशेष स्थान माना गया है. यहां चार अलग-अलग दिशाओं से आने वाले रास्ते एक-दूसरे से मिलते हैं. पंडित मनीष शर्मा के मुताबिक, धार्मिक और तांत्रिक मान्यताओं में चौराहे को विभिन्न दिशाओं और शक्तियों के मिलन स्थल के तौर पर देखा जाता है.
इसी वजह से पुराने समय से ही चौराहों पर कुछ विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए जाने की परंपरा रही है. इनमें बलि और बाधा निवारण से जुड़े कर्मकांड भी शामिल बताए जाते हैं. मान्यता है कि ऐसे अनुष्ठानों का उद्देश्य व्यक्ति को नकारात्मक प्रभावों, नजर दोष और जीवन में आने वाली परेशानियों से बचाना होता है. इसी धार्मिक विश्वास के कारण अनुष्ठान से जुड़ी वस्तुओं को छूने या उनके ऊपर से गुजरने से परहेज किया जाता है.
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कार्तिक अमावस्या की रात को क्यों माना जाता है विशेष?
हिंदू पंचांग में आने वाली सभी अमावस्याओं का अपना महत्व है, लेकिन कार्तिक महीने की अमावस्या यानी दीपावली को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह रात मां लक्ष्मी की पूजा, साधना और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के लिए खास होती है.
इसी अवसर पर कुछ स्थानों पर चौराहों के आसपास नींबू, मिर्च, सिंदूर, हल्दी, अक्षत, फूल, कपूर और सरसों जैसी चीजें रखी हुई दिखाई दे सकती हैं. मान्यता है कि इन सामग्रियों का इस्तेमाल नजर दोष दूर करने, बाधाओं से मुक्ति पाने और तंत्र-मंत्र से जुड़े विशेष अनुष्ठानों में किया जाता है.
पंडित मनीष शर्मा बताते हैं कि धार्मिक कर्मकांड पूरा होने के बाद इन सामग्रियों को कई बार चौराहों पर छोड़ दिया जाता है. ऐसी मान्यता है कि इन्हें पैर से छूने या लांघने से बचना चाहिए. हालांकि, यह धार्मिक और लोकविश्वासों पर आधारित परंपरा है, इसे किसी अनहोनी का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए.
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दिवाली की रात घर के दरवाजे खुले रखने की क्या है परंपरा?
दीपावली की रात मां लक्ष्मी के आगमन से जुड़ी एक और मान्यता काफी प्रचलित है. धार्मिक विश्वास के अनुसार, इस रात देवी लक्ष्मी घरों में भ्रमण करती हैं और जिन स्थानों पर साफ-सफाई, रोशनी और सकारात्मक वातावरण होता है, वहां उनका स्वागत किया जाता है.
इसी मान्यता के चलते कई परिवार दिवाली की रात घर के मुख्य दरवाजे खुले या थोड़े खुले रखते हैं. लोगों का विश्वास है कि घर का द्वार बंद होने पर मां लक्ष्मी वापस लौट सकती हैं. कुछ लोग इसी वजह से रात में लंबे समय तक घर खाली छोड़ने से भी बचते हैं.
इस तरह दिवाली की रात चौराहों से जुड़ी सावधानियां और घर के दरवाजे खुले रखने की परंपरा धार्मिक आस्था और सदियों से चली आ रही लोकमान्यताओं का हिस्सा हैं. इन परंपराओं को अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग-अलग तरीके से निभाया जाता है.
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