Jitiya vrat: हिंदू धर्म में कई ऐसे व्रत और पर्व हैं, जिनमें महिलाएं अपने परिवार और संतान की सुख-समृद्धि के लिए कठिन तपस्या करती हैं. इन्हीं में से एक है जितिया, जिसे संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना के लिए रखा जाता है.
इस व्रत की सबसे खास बात यह है कि इसमें माताएं करीब 24 घंटे से भी अधिक समय तक निर्जला उपवास करती हैं. यानी व्रत के दौरान अन्न तो दूर, पानी तक ग्रहण नहीं किया जाता है.
यही वजह है कि जितिया व्रत को कठिन व्रतों में गिना जाता है. खासतौर से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में इस व्रत की विशेष मान्यता है. ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस बार जितिया व्रत 3 अक्टूबर 2026, शनिवार को रखा जाएगा.
हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर की सुबह 4 बजकर 29 मिनट से शुरू होगी और 4 अक्टूबर की सुबह 2 बजकर 21 मिनट तक रहेगी.उदया तिथि की मान्यता के कारण 3 अक्टूबर को ही जितिया व्रत रखा जाएगा.
इस दिन पितरों की जाती है पूजा
परंपरा के अनुसार, व्रत रखने वाली महिलाएं व्रत से पहले सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करती हैं. इसके बाद सूर्य उदय होने के साथ ही निर्जला व्रत का संकल्प लिया जाता है. संतान की लंबी उम्र और उसके जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहे, इसी कामना के साथ महिलाएं पूरे दिन महिलाएं व्रत करती हैं. यह उपवास अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करने के साथ पूरा होता है. जितिया पर्व में केवल व्रत रखने की ही परंपरा नहीं है, बल्कि पूजा-पाठ और कथा का भी विशेष महत्व बताया गया है.
मान्यता है कि इस दिन पितरों की पूजा करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. कई जगहों पर महिलाएं मिट्टी और गाय के गोबर से चील और सियारिन की आकृति भी बनाती हैं और विधि-विधान से उनकी पूजा करती हैं. जितिया व्रत की पूजा कथा के बिना अधूरी मानी जाती है. इसलिए व्रती महिलाओं को पूजा के दौरान चील, सियारिन और जीमूतवाहन से जुड़ी जितिया व्रत की कथा जरूर सुननी चाहिए.
पूजा का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, जितिया व्रत से जुड़ी कई परंपराएं पीढ़ियों से चली आ रही हैं. व्रत से एक दिन पहले विशेष रूप से साग का सेवन करने की भी परंपरा कई परिवारों में है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसे व्रत की तैयारी का हिस्सा माना जाता है. इसके बाद ही व्रत का संकल्प लिया जाता है. वहीं, इस दिन पूजा के दौरान जीमूतवाहन की कथा सुनने की परंपरा भी महत्वपूर्ण मानी जाती है.
इस बार 3 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 6 बजकर 14 मिनट से 7 बजकर 3 मिनट तक रहेगा, जबकि अमृत काल दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से 2 बजकर 5 मिनट तक बताया गया है.

