Navratri 2026: नवरात्रि के नौ दिनों में घर-घर मां दुर्गा की पूजा अर्चना की जाती है और माता से आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है. इन 9 दिन व्रत रखकर माता की सेवा की जाती है, इस दौरान बहुत से लोग माता को मखाने की माला पहनाते हैं, जिसके लिए सुई धागे का प्रयोग किया जाता है. लेकिन क्या आपको पता है कि नवरात्रि में सप्तमी तिथि से पहले देवी को मखाने की माला सुई धागे से गूंथकर नहीं भेंट करना चाहिए. खास तौर पर जो लोग देवी उपासना का संकल्प लेकर पूजा कर रहे हैं उनको तो सूई धागे का प्रयोग सप्तमी तिथि तक भूलकर भी नहीं करना चाहिए.
नवरात्रि में क्यों नहीं करनाा चाहिए सुई का प्रयोग
दरअसल मान्यताओं के अनुसार सप्तमी तिथि तक देवी के नेत्र बंद रहते हैं, ऐसे में नवरात्रि की षष्ठी तिथि को बिल्वाभिमंत्रण किया जाता है जिसमें देवी के नेत्रों को जगाने के लिए जिस बेल के पेड़ मे जोड़े में दो बेल एक साथ होते हैं उसे बेल को देवी के नेत्रों के लिए चुना जाता है. उनकी पूजा करके सप्तमी तिथि को गाजे बाजे के साथ डोली में लाया जाता है फिर इससे देवी के नेत्रों को जगाया जाता है. ऐसे में कहा जाता है कि जब तक देवी के नेत्र नहीं खुल जाते हैं तब तक घर मे सुई धागे का प्रयोग नहीं करना चाहिए. इससे सुई माता की आंखों में चुभता है. इसलिए कहा जाता है कि नवरात्रि में सप्तमी तिथि तक सुई धागे का प्रयोग नहीं करें.
नवरात्रि में नजर दोष से बचने के लिए सुई के टोटके
आपको बता दें कि नवरात्रि में सुई को लेकर कई टोटके भी किए जाते हैं. कहा जाता है कि नवरात्रि में देवी की योगिनी शक्तियां भी देवी के साथ पृथ्वी पर आती हैं जो तंत्र मंत्र और सिद्धियों को देने वाली हैं. ऐसे में जो लोग नकारात्मक शक्तियों की उपासना करते हैं वह भी काली शक्तियों को जगाने के लिए तंत्र साधना किया करते हैं. इस दौरान नजर दोष और काली शक्तियों से बचाव के लिए प्राचीन काल से माताएं नवरात्रि के दिनो में छोटे बच्चों को काले कपड़े की ताबीज बनाकर पहनाती रही हैं. इस ताबीज में पीली सरसों, सुई को तोड़कर लपेट दिया जाता है. मान्यता है कि इससे बुरी नजर से बचाव होता है क्योंकि जो लोग काली शक्तियों का प्रयोग करते हैं उनकी आंखों में सुई चुभ जाती है.

