26 September 2026 Ka Panchang: 26 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि और शनिवार का दिन है. पूर्णिमा तिथि रात 10 बजकर 19 मिनट तक रहेगी. इस दिन स्नान-दानादि की पूर्णिमा है और इसी के साथ पितृ पक्ष की शुरुआत भी हो रही है. 26 सितंबर को दोपहर 11 बजकर 32 मिनट तक पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र रहेगा. इसके बाद उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र लग जाएगा. ऐसे में शनिवार के दिन शुभ कार्यों के लिए कौन से समय अनुकूल रहेंगे और अलग-अलग शहरों में राहुकाल कब रहेगा, आइए जानते हैं 26 सितंबर का पूरा पंचांग…
26 सितंबर 2026 का पंचांग
- पूर्णिमा तिथि: 26 सितंबर को रात 10 बजकर 19 मिनट तक
- पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र: दोपहर 11 बजकर 32 मिनट तक, इसके बाद उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र
- विशेष: 26 सितंबर से पितृ पक्ष की शुरुआत
26 सितंबर 2026 के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:36 बजे से 05:24 बजे तक
- प्रातः सन्ध्या: सुबह 05:00 बजे से 06:11 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:13 बजे से 03:01 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:13 बजे से 06:37 बजे तक
- सायाह्न सन्ध्या: शाम 06:13 बजे से 07:25 बजे तक
26 सितंबर को किस शहर में कब रहेगा राहुकाल?
- दिल्ली: सुबह 09:12 बजे से 10:42 बजे तक
- मुंबई: सुबह 09:19 बजे से 11:00 बजे तक
- चंडीगढ़: सुबह 09:14 बजे से 10:44 बजे तक
- लखनऊ: सुबह 08:57 बजे से 10:27 बजे तक
- भोपाल: सुबह 09:11 बजे से 10:41 बजे तक
- कोलकाता: सुबह 08:27 बजे से 09:57 बजे तक
- अहमदाबाद: सुबह 09:30 बजे से 11:00 बजे तक
- चेन्नई: सुबह 08:59 बजे से 10:30 बजे तक
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
- सूर्योदय- सुबह 06:05 बजे
- सूर्यास्त- शाम 06:28 बजे
26 सितंबर से शुरू हो रहा पितृ पक्ष
26 सितंबर से पितृ पक्ष की शुरुआत हो रही है. भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से सोलह दिवसीय श्राद्ध प्रारंभ होते हैं. दिए गए पंचांग के अनुसार, श्राद्ध की शुरुआत 26 सितंबर से होगी और आश्विन महीने की अमावस्या यानी 10 अक्टूबर, शनिवार को इसका समापन होगा. श्राद्ध को महालय या पितृ पक्ष के नाम से भी जाना जाता है.
‘श्राद्ध’ शब्द श्रद्धा से बना है, जिसका अर्थ पितरों के प्रति श्रद्धा भाव से जुड़ा है. मान्यता के अनुसार, हमारे भीतर प्रवाहित रक्त में हमारे पितरों के अंश होते हैं और इसी कारण हम उनके ऋणी माने जाते हैं. इस ऋण से मुक्ति और पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए श्राद्ध कर्म किए जाते हैं.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई सामान्य मान्यताओं और ज्योतिष गणनाओं पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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