सर्व पितृ अमावस्या, 9 या 10 अक्टूबर?
दरअसल, सर्व पितृ अमावस्या हर साल आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का मनाते हैं. इस बार अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर दिन शुक्रवार को रात 9:35 बजे से शुरू होगी. यह तिथि अगले दिन 10 अक्टूबर रविवार को रात 09:19 बजे तक उपस्थित रहेगी. ऐसे में 10 अक्टूबर को अमावस्या की उदयातिथि प्राप्त हो रही है. उस दिन सूर्योदय सुबह में 06:19 बजे होगा और उस समय अमावस्या रहेगी और रात में खत्म होगी. सर्व पितृ अमावस्या के लिए कुतुप मुहूर्त और रौहिण मुहूर्त 10 अक्टूबर को मिल रहा है. इस आधार पर सर्व पितृ अमावस्या 10 अक्टूबर शनिवार को है.
तर्पण-श्राद्ध का मुहूर्त
सर्व पितृ अमावस्या के दिन तर्पण और श्राद्ध दिन में किया जाता है, इसके लिए कुतुप मुहूर्त और रौहिण मुहूर्त है, उसके बाद से अपराह्न काल उपलब्ध होगा. कुतुप मुहूर्त और रौहिण मुहूर्त 47-47 मिनट का होगा, वहीं अपराह्न काल 2 घंटे 20 मिनट का होगा.
- कुतुप मुहूर्त: दिन में 11:45 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
- रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:31 बजे से लेकर दोपहर 01:18 बजे तक
- अपराह्न काल: दोपहर 01:18 बजे से लेकर दोपहर 03:37 बजे तक
स्नान-दान का मुहूर्त
10 अक्टूबर को सर्व पितृ अमावस्या के साथ आश्विन अमावस्या है. ऐसे में जिन लोगों को पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण नहीं करना है, उनके लिए आश्विन अमावस्या का दिन स्नान और दान के लिए महत्वपूर्ण है. आश्विन अमावस्या पर स्नान और दान करने से पाप मिटते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है.
आपको बता दें कि आश्विन अमावस्या पर स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त उत्तम होता है. ऐसे में 10 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त 04:40 am से 05:29 am तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:45 am से दोपहर 12:31 pm तक है. जो लोग ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और दान न कर पाएं, वे सूर्योदय के बाद कर सकते हैं.
शनिश्चरी अमावस्या का संयोग
सर्व पितृ अमावस्या के दिन शनिश्चरी अमावस्या का संयोग बना है. उस दिन स्नान और दान के बाद शनिदेव की पूजा करनी चाहिए. उनकी कृपा से साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्ट दूर होते हैं. ऐसे में शनिश्चरी अमावस्या के दिन शमी के पेड़ की पूजा करें. व्रत रखकर शनिदेव को तेल से अभिषेक करें. शनि से संबंधित वस्तुओं जैसे काली उड़द, काले तिल, लोहा, जूते, चप्पल, काले या नीले वस्त्र आदि का दान करें.