17 October 2026 Ka Panchang: 17 अक्टूबर 2026, शनिवार को आश्विन शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है. इस दिन शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन मनाया जाएगा और मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जाएगी. शनिवार सुबह 9 बजकर 4 मिनट तक रवि योग रहेगा. वहीं, सुबह 9 बजकर 47 मिनट तक मूल नक्षत्र रहेगा, इसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र शुरू हो जाएगा. इसके अलावा शनिवार शाम 7 बजकर 50 मिनट पर सूर्य देव तुला राशि में गोचर करेंगे. आइए जानते हैं 17 अक्टूबर का पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय….
17 अक्टूबर 2026 का पंचांग
- दिन: शनिवार.
- तिथि: आश्विन शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि रविवार सुबह 8 बजकर 29 मिनट तक रहेगी.
- रवि योग: शनिवार सुबह 9 बजकर 4 मिनट तक.
- नक्षत्र: मूल नक्षत्र सुबह 9 बजकर 47 मिनट तक, इसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र शुरू होगा.
- सूर्य गोचर: शनिवार शाम 7 बजकर 50 मिनट पर सूर्य देव तुला राशि में प्रवेश करेंगे.
- विशेष: शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन, महासप्तमी, मां कालरात्रि की पूजा और सूर्य गोचर.
17 अक्टूबर 2026 का शुभ समय
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:55 बजे से 5:44 बजे तक.
- प्रातः संध्या: सुबह 5:19 बजे से 6:33 बजे तक.
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:47 बजे तक.
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:14 बजे से 6:39 बजे तक.
- सायाह्न संध्या: शाम 6:14 बजे से 7:28 बजे तक.
राहुकाल का समय
- दिल्ली: सुबह 9:15 बजे से 10:41 बजे तक.
- मुंबई: सुबह 9:29 बजे से 10:56 बजे तक.
- चंडीगढ़: सुबह 9:17 बजे से 10:43 बजे तक.
- लखनऊ: सुबह 8:59 बजे से 10:26 बजे तक.
- भोपाल: सुबह 9:12 बजे से 10:39 बजे तक.
- कोलकाता: सुबह 8:28 बजे से 9:55 बजे तक.
- अहमदाबाद: सुबह 9:31 बजे से 10:58 बजे तक.
- चेन्नई: सुबह 8:57 बजे से 10:26 बजे तक.
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
- सूर्योदय: सुबह 6:22 बजे.
- सूर्यास्त: शाम 5:49 बजे.
महासप्तमी पर मां कालरात्रि की पूजा का महत्व
शारदीय नवरात्रि की सप्तमी तिथि को महासप्तमी के रूप में मनाया जाता है. इस दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि का स्वरूप भले ही विकराल दिखाई देता है, लेकिन वे अपने भक्तों का कल्याण करने वाली और उन्हें भय से मुक्ति दिलाने वाली देवी हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि ने दुष्ट शक्तियों का संहार कर धर्म की रक्षा की.
उनका स्वरूप बुराई पर शक्ति की विजय का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि मां कालरात्रि की पूजा करने से भक्तों को साहस और आत्मविश्वास मिलता है तथा जीवन की बाधाओं का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है. नवरात्रि के सातवें दिन भक्त मां कालरात्रि की विधि-विधान से पूजा करते हैं और उनसे सुख-समृद्धि, सुरक्षा और कल्याण की कामना करते हैं. इस दिन मां के मंत्रों का जाप और दुर्गा सप्तशती का पाठ करना भी शुभ माना जाता है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई सामान्य मान्यताओं और ज्योतिष गणनाओं पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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