Special Summary Revision: देश की राजधानी नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन के बीच चुनाव आयोग ने 17 प्रदेश और केंद्र शासित राज्यों में SSR की प्रक्रिया कराने का आदेश जारी कर दिया है. ऐसे में सवाल ये है कि एक तरफ तो SIR को लेकर हंगामा मचा है और इसमें SSR क्या शुरू हो गया?
इस SSR को समझें तो इसको स्पेशल समरी रिवीजन कहा जाता है. हिंदी में इसका तर्जुमा विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण है. यह वैसे ही है जैसे SIR यानी स्पेशल इन्टेंसिव रिवीजन को विशेष गहन पुनरीक्षण कहा जाता है. अब सवाल है कि SSR है क्या और इसकी जरूरत क्यों पड़ी? ये एसआईआर से कैसे अलग है? बता दें कि ये आने वाले साल से पहले वोटर लिस्ट को अपडेट करने के लिए चुनाव अथॉरिटी की ओर से हर साल की जाने वाली वैधानिक प्रक्रिया है, जिसके प्रक्रिया के तहत किसी निश्चित अवधि के दौरान नागरिकों से दावे और आपत्तियां मांगी जाती है. जैसे इस SSR के लिए एक जनवरी 2027 की तारीख को आधार बनाया गया है.
क्या है ये SSR?
बता दें कि यह प्रक्रिया वोटर लिस्ट की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए काफी हद तक खुद से किए जाने वाले आवेदन और साथ ही बूथ लेवल अधिकारियों की ओर से घर-घर जाकर किए जाने वाले रुटीन वेरिफिकेशन पर निर्भर करती है. दरअसल, बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की ओर से हर घर में जाकर वेरिफिकेशन के साथ ही वोटर लिस्ट से छूटे मतदाता, गलतियों को सुधारना शामिल है. इसमें सभी चीजों के लिए फॉर्म-6, 6A, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 का यूज किया जा सकता है.
सभी मतदान केंद्रों और चुनावी कार्यालयों में वोटर सूची का ड्राफ्ट प्रकाशित किया जाता है. अब इसमें वे योग्य नागरिक जो निर्धारित क्वालिफाइंग डेट तक 18 साल की उम्र पूरी कर लेते हैं, वे नए मतदाता रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा, मौजूदा मतदाता अपने डेमोग्राफिक डिटेल में सुधार के साथ ही मृत रिश्तेदारों के नाम सूची से हटवाने या फिर निर्वाचन क्षेत्र के डिटेल में बदलाव के लिए भी आवेदन कर सकते हैं.
SSR से कैसे अलग है SIR?
दरअसल, SSR की प्रक्रिया के विपरीत, SIR एक बेहद कड़े लेवल का और जमीन से जुड़ा वेरिफिकेशन अभियान है. मौजूदा मतदाता सूचियों को आधार मानने की बजाय, इन्टेंसिव रिवीजन में पूरी मतदाता सूची को पूरी तरह से फिर से वेरिफिकेशन के अधीन ही माना जाता है. एसआईआर के दौरान फील्ड ऑफिसर्स सभी टार्गेटेड घरों में जाकर फीजिकल वेरिफिकेशन कर रहे हैं. किसी जूरिस्डिक्शन में रहने वाले हर एक इंसान को पात्रता, निवास और पहचान साबित करने वाले नए दस्तावेज जमा करने होते हैं, जिससे यह प्रॉसेस केवल एक स्थापित सूची को अपडेट करने के बजाय रजिस्टर को पूरी तरह फिर से जीरो से तैयार करने के जैसी बन जाती है.
अब अगर इन दोनों प्रक्रियाओं के बीच मुख्य अंतर पर गौर करें तो ये सबूत पेश करने के भार और प्रशासनिक लेवल पर तेजी से जुड़ा हुआ है. SSR में, जब तक कोई स्पष्ट आपत्ति या नाम हटाने का आवेदन दर्ज करके उसका वेरिफिकेशन नहीं किया जाता है, तब तक मौजूदा मतदाता खुद-ब-खुद ही सूची में बने रहते हैं. यह प्रक्रिया बिना किसी बाधा के और क्रमिक अपडेट के लिए डिजाइन की गई है.
वहीं गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के दौरान सबूत संबंधी जरूरत बढ़ जाती है. नागरिकों को आमतौर पर अपनी मतदाता स्थिति को बनाए रखने के लिए खास दस्तावेज पेश करने की जरूरत होती है. इससे सिविल सोसायटी ग्रुप के बीच विशेषकर हाशिए की आबादी के वोटर्स को संभावित तौर पर बाहर किए जाने को लेकर चिंता होती है. ये वे लोग हैं जिनके पास औपचारिक पहचान पत्र नहीं हो सकते हैं.
ECI क्यों बनाए रखता है ये 2 सिस्टम?
निर्वाचन आयोग अलग-अलग प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए दोनों प्रॉसेस का उपयोग करता है. एक तरफ सालाना समरी रिवीजन SSR यह सुनिश्चित करता है कि नागरिकों के लिए न्यूनतम बाधाओं के साथ मतदाता सूची लगातार अपडेट बनी रहे. दूसरी तरफ SIR गहन पुनरीक्षण ऐतिहासिक रूप से उन खास इलाकों के लिए रिजर्व रहे हैं जो डेमोग्राफिक शिफ्ट यानी जनसांख्यिकीय बदलावों, बड़े पैमाने पर गलतियों की आशंका या फिर बाउंड्री लिमिट्स को फिर से तैयार किए जाने की प्रक्रिया से गुजर रहे होते हैं.अब चुनाव आयोग की तैयारी यह है कि देश के 17 राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों में इस SSR को लागू किया जाए. इससे देशभर में चल रहे प्रशासनिक बदलावों को मैनेज करते हुए स्टैंडर्ड लोकतांत्रिक तैयारियों को बनाए रखना चाहता है.

