London: ब्रिटेन में हत्या के एक चर्चित मामले में दोषी ठहराई गई भारतीय महिला किरण कौर को भारत वापस भेजने की तैयारी की जा रही है. किरण पर अपने बेटे विक्रम डिगवा की हत्या के मामले में मदद करने का आरोप साबित हुआ था. ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि वह विदेशी अपराधियों को जल्द से जल्द निर्वासित करने की नीति पर काम करता है. किरण कौर (53) को इस साल जुलाई में तीन साल की जेल की सजा सुनाई गई थी. उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने बेटे द्वारा हत्या में इस्तेमाल किए गए चाकू को घर ले जाकर अपराध के बाद उसकी मदद की.
नोवाक की हत्या के मामले में उम्रकैद
उनका बेटा विक्रम डिगवा 18 वर्षीय हेनरी नोवाक की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है. यह घटना पिछले साल 3 दिसंबर को हुई थी, जब 23 वर्षीय विक्रम डिगवा ने हेनरी नोवाक की चाकू मारकर हत्या कर दी थी. इस साल जून में अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई. उसे 21 साल जेल में बिताने होंगे, जिसके बाद ही वह पैरोल के लिए पात्र हो सकेगा. ब्रिटेन की सरकार अब जेलों पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए बनाई गई योजना के तहत किरण को समय से पहले रिहा करने की तैयारी कर रही है. इसके बाद उनके निर्वासन का रास्ता खुल सकता है.
निर्वासित करने का हमेशा प्रयास करेंगे
ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने कहा कि हम विदेशी अपराधियों को पहले अवसर पर निर्वासित करने का हमेशा प्रयास करेंगे. मंत्रालय ने हेनरी नोवाक के परिवार और मित्रों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि हिंसा की इस भयावह घटना में उनकी जिंदगी बेरहमी से छीन ली गई. ब्रिटेन में आम तौर पर 12 महीने या उससे अधिक की जेल की सजा पाने वाले विदेशी नागरिकों को निर्वासन के लिए विचाराधीन रखा जाता है. हालांकि, इस नियम के कुछ अपवाद भी हैं और संबंधित व्यक्ति फैसले के खिलाफ अपील कर सकता है.
किरपान सिख धर्म का एक धार्मिक प्रतीक
यह मामला तब और विवादित हो गया, जब आरोपी ने धार्मिक आत्मरक्षा की दलील देते हुए हत्या में इस्तेमाल हथियार को किरपान बताया. किरपान सिख धर्म का एक धार्मिक प्रतीक है, जिसे ब्रिटेन में कुछ कानूनी छूट के तहत धारण किया जा सकता है. हालांकि, अदालत ने इस दलील को हत्या के औचित्य के रूप में स्वीकार नहीं किया. किरण को सजा सुनाते हुए न्यायमूर्ति विलियम मौस्ले ने कहा कि सिख धर्म का मूल सिद्धांत है कि किरपान को धार्मिक आस्था के प्रतीक के रूप में धारण किया जाता है, न कि किसी पर हमला करने के उद्देश्य से. न्यायाधीश ने कहा कि किसी भी हथियार का इस्तेमाल तभी उचित माना जा सकता है, जब उसके पीछे अत्यंत गंभीर और तत्काल खतरा हो.
सही रास्ता अपनाने के लिए प्रेरित करता
किरण इस बात से अनजान नहीं हो सकती थीं. न्यायाधीश ने कहा कि एक जिम्मेदार अभिभावक अपने बेटे के कृत्य पर सवाल उठाता और उसे सही रास्ता अपनाने के लिए प्रेरित करता. इसके विपरीत, किरण चाकू को घर ले गईं और उसे अपने बेटे के कमरे में रखे धार्मिक तथा अन्य हथियारों के संग्रह में शामिल कर दिया. सजा सुनाते समय न्यायाधीश ने किरण के जीवन के कठिन दौर का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि भारत में उनका जीवन मुश्किलों भरा रहा था, लेकिन शादी के बाद और करीब 30 साल पहले ब्रिटेन आने पर उनकी परिस्थितियों में सुधार हुआ.
बेटे को बचाने के लिए गलत कदम उठाया
न्यायाधीश ने यह भी माना कि किरण ने अपने बेटे को बचाने के लिए गलत कदम उठाया था, न कि किसी निजी लाभ के लिए. उनके दोबारा अपराध करने की आशंका भी बेहद कम बताई गई. किरण कौर अपनी मूल सजा के खिलाफ अपील दायर कर चुकी हैं. ब्रिटेन की अपील अदालत में 5 नवंबर को इस मामले की सुनवाई निर्धारित है. उनके बेटे विक्रम डिगवा को भी अपनी उम्रकैद की सजा के खिलाफ अपील करने की अनुमति मिल चुकी है. उसकी अपील पर भी उसी दिन सुनवाई होनी है.
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