Solar Eclipse 2026: 12 अगस्त को एक बार फिर दुनिया को आसमान में एक दुर्लभ खगोलीय नजारा देखने को मिलेगा. यह नजारा साल के पहले पूर्ण सूर्य ग्रहण का है, जो ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, स्पेन और पुर्तगाल में देखा जा सकेगा. वहीं भारत में ये अदृश्य होगा, क्योंकि ग्रहण का समय रात 9:04 बजे है और उस वक्त भारत में रात का समय होगा. इसीलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा. खास बात ये है जिस समय सूर्यग्रहण हेागा, उस समय स्पेन में शाम हो रही होगी, ऐसे में लोगों को ग्रहण के बाद अर्धचंद्राकार सूर्य के डूबने का अनोखा दृश्य देखने को मिल सकता है.
बता दें कि 12 अगस्त को लग रहा यह सूर्यग्रहण साल का दूसरा ग्रहण है, हालांकि पूर्ण सूर्यग्रहण के मामले में यह पहला है. इससे पहले 17 फरवरी को वलयाकार सूर्यग्रहण लगा था. खास बात ये है कि 1999 के बाद यूरोप में दिखने वाला यह पहला पूरा सूर्यग्रहण होगा. जो खगोल प्रेमियों के लिए बेहद दुर्लभ दृश्य होने वाला है.
क्या होता है पूर्ण सूर्य ग्रहण?
दरअसल,पूर्ण सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है. जिन इलाकों पर चंद्रमा की पूर्ण छाया पड़ती है, वहां लोगों को टोटल सोलर एक्लिप्स दिखाई देता है. जबकि, बाकी क्षेत्रों में आंशिक सूर्य ग्रहण देखा जा सकता है, जिसमें सूर्य का केवल कुछ हिस्सा ही ढकता है. चूंकि यह पूर्ण सूर्य ग्रहण स्पेन में शाम के समय दिखाई देगा, इसलिए वहां के खगोल प्रेमियों को एक बेहद दुर्लभ होगा. जो लोग ग्रहण की पूर्ण छाया वाले क्षेत्र में होंगे वे इसे देख पाएंगे, बाकी उत्तरी अमेरिका, कनाडा, यूरोप के बड़े हिस्से और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका में यह आंशिक ग्रहण के तौर पर ही दिखाई देगा.
सूर्य ग्रहण को सीधे क्यों नहीं देखना चाहिए?
नासा के अनुसार, बिना किसी आंखों की सुरक्षा के सूर्य को देखने का एकमात्र सुरक्षित समय पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान आने वाला पूर्णता का चरण है, जब चंद्रमा सूर्य की रोशनी को पूरी तरह ढक लेता है. जैसे ही सूर्य की रोशनी का थोड़ा भी हिस्सा दिखाई देने लगे, आंखों की सुरक्षा जरूरी हो जाती है. सूर्य की सतह का केवल 1% हिस्सा भी दिखाई दे रहा हो, तब भी उससे निकलने वाली रेज आंखों को नुकसान पहंुचाती हैं.