New Delhi: सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने एक अहम रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. जिसके तहत इन देशों ने हमलों का मिलकर जवाब देने का संकल्प लिया. मिडिल ईस्ट में संकट के बीच इस तरह की एकजुटता से वैश्विक स्तर पर बडा प्रभाव हो सकता है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने शुक्रवार को मक्का में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए.
सामूहिक सुरक्षा मजबूत
अमेरिका के सुन्नी मुस्लिम सहयोगी देश एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष के बीच सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करना चाहते हैं, जिसमें खाड़ी के तेल निर्यातक देशों पर मिसाइल हमले हुए हैं. मक्का संयुक्त रक्षा समझौता नाम के इस समझौते में तीनों देशों की तरफ से ली गई जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से नहीं बताया गया है. हालांकि, शुक्रवार को जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि इस समझौते का मकसद सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करना और क्षेत्र व उसके बाहर शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देना है.
किसी भी तरह की आक्रामकता के खिलाफ
कराची के अखबार ‘डॉन’ की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने कहा कि इस समझौते का मकसद किसी भी तरह की आक्रामकता के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध को मजबूत करना है. इसमें यह भी तय किया गया है कि तीनों देशों में से किसी एक पर भी सशस्त्र हमला होने पर उसे उन सभी पर हमला माना जाएगा. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने मक्का में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए.
तीनों देशों की साझा प्रतिबद्धता
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने कहा कि यह समझौता सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करने और एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य के लिए क्षेत्र व उसके बाहर शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के प्रति तीनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
इसे भी पढ़ें. जूनियर एशिया कप के लिए भारतीय पुरुष हॉकी टीम का ऐलान, अनमोल एक्का को मिली कप्तानी