Japan Missile Test: पश्चिम एशिया में इस समय जिस तरह के हालात बन रहे हैं, उनसे दुनिया के तमाम देशों में डर का भाव पैदा हो रहा है, जिसका असर ग्लोबल लेवल पर साफ साफ देखा जा सकता है. इस समय हथियार खरीदने या फिर उसे डेवलप करने पर इन्वेस्टमेंट काफी बढ़ चुका है. वर्षो से शांति और सुरक्षात्मक रक्षा नीति पर चलने वाले देश भी अब अपने सिस्टम को दुरुस्त करने में जुट गए हैं. उनमें जापान का नाम सबसे टॉप पर है. हाल ही में जापान की ओर से दो मिसाइलों का परीक्षण किया गया है. इनमें से एक की रेंज तो 1600 किलोमीटर बताई जा रही है. इससे इंडो-पैसिफिक रेंज में पावर बैलेंस की स्थिति बनने की संभावना प्रबल हो गई है.
चीन की मनमानी पर लगेगा लगाम, जापान दुरुस्त कर रहा अपना रक्षा सिस्टम, भारत को फायदा ही फायदा
Japan Missile Test
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वहीं, चीन के लिए यह खबर कतई अच्छी नहीं है, क्योंकि निकट भविष्य में उसकी मनमानियों पर रोक लग सकती है, लेकिन भारत के लिए यह काफी अच्छी साबित हो सकती है, क्योंकि भारत और जापान के बीच ऐतिहासिक रूप से अच्छे संबंध हैं. भारत के बॉर्डर इलाके में चीन अपना नापाक मंसूबा समय-समय पर दिखाता रहा है, ऐसे में हिंद-प्रशांत में सैन्य रूप से मजबूत दोस्त के होने से तस्वीर बदल सकती है.
जापान ने अपनी रक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देते हुए लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल सिस्टम्स के सफल परीक्षण किए हैं. अब तक केवल रक्षात्मक सैन्य नीति अपनाने वाला जापान धीरे-धीरे ऐसी क्षमता विकसित कर रहा है, जिससे वह दुश्मन के ठिकानों पर जवाबी हमला भी कर सके. जुलाई के अंतिम सप्ताह में जापान के रक्षा मंत्रालय ने दो महत्वपूर्ण टेस्ट किए, जिसमें पहला परीक्षण जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JMSDF) ने अमेरिकी नेवी के सहयोग से प्रशांत महासागर में किया, जिसमें कोंगो क्लास के एजिस डिस्ट्रॉयर जेएस चोकाई (JS Chokai) से टॉमहॉक लैंड-अटैक क्रूज मिसाइल दागी गई. इसके साथ ही जापान सतह पर तैनात वॉरशिप से टॉमहॉक मिसाइल का प्रक्षेपण करने वाला तीसरा विदेशी देश बन गया.
वहीं, दूसरा परीक्षण गिफू एयर बेस पर किया गया, जहां जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JASDF) ने F-2 लड़ाकू विमान से अपग्रेडेड टाइप-12 एयर-लॉन्च मिसाइल का फ्लाइट टेस्ट शुरू किया. इस नई मिसाइल की मारक क्षमता 900 किलोमीटर से अधिक बताई जा रही है, जबकि भविष्य में विकसित किए जा रहे वेरिएंट की रेंज 1,600 किलोमीटर तक हो सकती है. इन हथियारों को कम रडार पहचान वाली, नेटवर्क आधारित और लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाली प्रणाली के रूप में विकसित किया जा रहा है.
इस बदलाव का सबसे अधिक असर चीन के साथ रणनीतिक संतुलन पर पड़ सकता है. दरअसल, हाल के महीनों में जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी द्वारा परमाणु हथियारों पर चर्चा की संभावना जताने और प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची द्वारा ताइवान को जापान की संप्रभुता से जुड़ा सुरक्षा मुद्दा बताए जाने के बाद बीजिंग की चिंताएं और बढ़ गई हैं.