दिग्गज टेक कंपनी अल्फाबेट और गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने गुरुवार को कहा कि भारत में हो रहे तेज बदलाव उन्हें बेहद प्रभावित कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि एआई को लेकर दुनिया को साहसिक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है, क्योंकि यह अरबों लोगों के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकता है. इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में संबोधित करते हुए पिचाई ने बताया कि उनकी कंपनी इंडिया-अमेरिका कनेक्ट पहल के तहत दोनों देशों के बीच चार नई प्रणालियों सहित समुद्र के नीचे बिछाई जाने वाली फाइबर ऑप्टिक केबलों का एक विशाल नेटवर्क तैयार कर रही है.
किसानों और समाज के लिए AI का उपयोग
उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “भारत में, हम किसानों को उनकी आजीविका की रक्षा करने में मदद कर रहे हैं. पिछले साल भारतीय सरकार ने एआई-आधारित पूर्वानुमान लाखों किसानों को भेजे, जिससे उन्हें खराब मौसम के बारे में चेतावनी मिली.” पिचाई ने आगे कहा, “जब तक हम मिलकर काम नहीं करेंगे, तब तक हम एआई के पूरे लाभ प्राप्त नहीं कर पाएंगे.” उन्होंने यह भी कहा कि हम हाईपर-प्रगति के दौर की दहलीज पर हैं और एआई को साहसपूर्वक अपनाना जरूरी है, क्योंकि यह अरबों लोगों के जीवन को बेहतर बना सकता है.
दवा अनुसंधान में AI की बड़ी भूमिका
उन्होंने बताया, “दशकों तक प्रोटीन संरचनाओं की भविष्यवाणी करना एक बड़ी चुनौती रही, जिसने दवा खोज की प्रक्रिया को धीमा किया.” आज 190 देशों में 30 लाख से अधिक शोधकर्ता इसका उपयोग मलेरिया के टीके विकसित करने के लिए कर रहे हैं. गूगल भारत में अपने 15 अरब डॉलर के अवसंरचना निवेश के तहत एक पूर्ण-स्तरीय एआई हब स्थापित कर रहा है. पिचाई के अनुसार, कंपनी भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने, स्टार्टअप्स को समर्थन देने, कृषि और अन्य क्षेत्रों में एआई के व्यापक उपयोग पर काम कर रही है.
AI अनुसंधान और निवेश पर जोर
उन्होंने कहा कि देश को एआई अनुसंधान को बढ़ावा देने और सभी क्षेत्रों में इसके उपयोग के लिए पर्याप्त निवेश सुनिश्चित करना चाहिए. नई दिल्ली के भारत मंडपम में 16 से 20 फरवरी तक इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 आयोजित किया जा रहा है. इस शिखर सम्मेलन में दुनिया भर के नीति निर्माता, उद्योगपति, शिक्षाविद, नवप्रवर्तक और नागरिक समाज के प्रतिनिधि एक मंच पर एकत्र हुए हैं. इसका उद्देश्य एआई के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग को मजबूत करना और संवाद के लिए एक साझा मंच प्रदान करना है. इस समिट में 110 से अधिक देशों और 30 अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भागीदारी हो रही है. साथ ही, करीब 20 राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख और लगभग 45 मंत्री भी इसमें शामिल हो रहे हैं.