देश में बढ़ती बिजली खपत के बीच Adani Group ने Green Energy पर बढ़ाया फोकस

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने दिसंबर में गुजरात के कच्छ रण का दौरा किया. यह देश के सबसे महत्वाकांक्षी रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट की साइट है. यह यात्रा केवल प्रतीकात्मक नहीं थी, बल्कि इसने पैमाने, गति और क्रियान्वयन पर केंद्रित रणनीति को मजबूत किया. भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी के कारण बिजली की मांग में भी लगातार इजाफा हो रहा है. वित्त वर्ष 2025 में अधिकतम ऊर्जा की मांग लगभग 250 गीगावाट थी, जो वित्त वर्ष 2032 तक 388 गीगावाट तक पहुंचने की संभावना है.

भारत में ऊर्जा खपत में तेजी

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) के मुताबिक, भारत की ऊर्जा खपत अगले 30 वर्षों में वैश्विक औसत के मुकाबले 1.5 गुना तेजी से बढ़ेगी. ऊर्जा मांग में 2030 तक 25 से 35% तक का इजाफा हो सकता है. ग्रिड को कार्बनमुक्त करते हुए इस मांग को पूरा करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को तेजी से और विश्वसनीय रूप से विस्तारित करने की आवश्यकता होगी. इस बदलाव में निजी क्षेत्र की भागीदारी महत्वपूर्ण रही है. सरकारी नीतियों और अनुमतियों ने इस परियोजना के लिए मजबूत ढांचा तैयार किया, जबकि क्रियान्वयन निजी उद्यमों द्वारा किया गया.

कच्छ में 20 गीगावाट क्षमता वाला अदाणी नवीकरणीय ऊर्जा पार्क

दक्षता, पूंजी, तकनीकी विशेषज्ञता और परियोजना प्रबंधन ने नवीकरणीय ऊर्जा के विकास की गति को और तेज किया है. बड़े डेवलपर्स ने नीतिगत महत्वाकांक्षा को वास्तविक परिचालन क्षमता में बदल दिया है, और कच्छ का विशाल रण इसका प्रमुख उदाहरण है. गौतम अदाणी द्वारा निरीक्षित इस स्थान पर एक नवीकरणीय ऊर्जा पार्क विकसित किया जाएगा, जिसकी क्षमता लगभग 20 गीगावाट पवन और सौर ऊर्जा उत्पादन की होगी. इतनी बड़ी क्षमता ऊर्जा-गहन अर्थव्यवस्था के लिए क्रांतिकारी साबित हो सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े नवीकरणीय ऊर्जा पार्क कार्बन उत्सर्जन कम करने का सबसे प्रभावी तरीका हैं. इसके साथ ही दरें प्रतिस्पर्धी बनी हुई हैं.

भारत में नवीकरणीय ऊर्जा का भविष्य

विशाल शुष्क भूमि, तेज हवा के गलियारे और उच्च सौर विकिरण वैश्विक मानकों के अनुसार ऐसी परियोजनाओं को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य बनाते हैं. इस महत्वाकांक्षा को पूंजी का समर्थन प्राप्त है. अदाणी समूह ने भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति देने के लिए पांच वर्षों में 75 अरब डॉलर तक के निवेश का वादा किया है. ऐसे समय में जब वैश्विक पूंजी अधिक चुनिंदा होती जा रही है, इस तरह की दीर्घकालिक प्रतिबद्धताएं न केवल नवीकरणीय ऊर्जा में, बल्कि भारत की बढ़ती मांग और नीतिगत स्थिरता में भी विश्वास का संकेत देती हैं.

भारत में 2025 में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का रिकॉर्ड विस्तार

साल 2025 में भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अब तक की सबसे अधिक वार्षिक वृद्धि दर्ज की. नवंबर तक, 44 गीगावाट से अधिक नई क्षमता जुड़ चुकी थी, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी थी. इस विस्तार में सौर और पवन ऊर्जा का प्रमुख योगदान रहा. कुल स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़कर लगभग 254 गीगावाट हो गई. नीति निर्माता और उद्योग जगत दोनों के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि नवीकरणीय ऊर्जा अब हाशिए पर नहीं है, बल्कि भारत की विद्युत प्रणाली का केंद्रीय घटक बन चुकी है. अदाणी समूह की रणनीति भी इसी राष्ट्रीय प्रगति के अनुरूप आकार ले रही है.

अदाणी का AGEL पोर्टफोलियो योगदान

9 दिसंबर को आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में बोलते हुए, अदाणी ने बताया कि भारत ने अपनी स्थापित विद्युत क्षमता का 50% से अधिक गैर-जीवाश्म ईंधन से प्राप्त करने का मील का पत्थर पार कर लिया है. यह उपलब्धि 2030 के पेरिस समझौते की समय सीमा से पांच साल पहले हासिल की गई. वैश्विक स्तर पर प्रति व्यक्ति उत्सर्जन सबसे कम होने के कारण, भारत के लिए चुनौती विकास नहीं है, बल्कि स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा है. क्रियान्वयन ही सफलता का मूल मंत्र है. अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) के माध्यम से समूह ने दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो में से एक का निर्माण किया है.

AGEL भारत की सबसे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा कंपनी

2016 में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में प्रवेश करने के एक दशक से भी कम समय में, अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) की परिचालन क्षमता 17 गीगावॉट से अधिक हो गई है. AGEL अब भारत की सबसे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा कंपनी बन चुकी है और वैश्विक स्तर पर शीर्ष 10 कंपनियों में शुमार है. FY26 की पहली छमाही में कंपनी ने 2.4 गीगावॉट क्षमता का विस्तार किया, जो किसी भी उद्योग कंपनी द्वारा अब तक का सबसे बड़ा विस्तार है. कंपनी पूरे वर्ष में 5 गीगावॉट क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखती है और 2030 तक इसकी दीर्घकालिक लक्ष्य 50 गीगावॉट है.

भारत में शहरीकरण, डिजिटलीकरण और औद्योगिक विकास के चलते बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में ये बड़े नवीकरणीय ऊर्जा मॉडल अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. दिसंबर में गौतम अदाणी की कच्छ की यात्रा ने इस महत्वाकांक्षा को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया. नमक के मैदानों और तेज हवाओं के बीच यह परियोजना भविष्य के ऊर्जा दृष्टिकोण को प्रत्यक्ष रूप से प्रतिबिंबित करती है.

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