Foreign Universities in India: 2040 तक 113 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा बचा सकता है भारत, रिपोर्ट में दावा

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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एक रिपोर्ट में गुरुवार को बताया गया कि यदि भारत विदेशी विश्वविद्यालयों को देश में अपनी मजबूत मौजूदगी स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करता है, तो वर्ष 2040 तक लगभग 113 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा देश में ही बचाई जा सकती है. इसके लिए अंतरराष्ट्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों को करीब 1.9 करोड़ वर्ग फुट वर्टिकल कैंपस स्पेस की आवश्यकता होगी. डेलॉइट इंडिया और नाइट फ्रैंक इंडिया की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत में आने से छात्रों द्वारा विदेश में पढ़ाई पर होने वाला भारी खर्च काफी हद तक कम किया जा सकता है.

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NEP 2020 के बाद भारत बन रहा वैश्विक शिक्षा केंद्र

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के प्रभाव से भारत एक छात्र भेजने वाले देश से वैश्विक ज्ञान केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है. वर्तमान में देश में लगभग 5.3 करोड़ छात्र उच्च शिक्षा में नामांकित हैं. सरकार का लक्ष्य 2035 तक सकल नामांकन अनुपात को 50% तक पहुंचाना है, जिसके लिए छात्रों की संख्या बढ़कर करीब 7.2 करोड़ हो सकती है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षा संस्थानों में अवसरों की भारी कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है.

IIT सीटों की कमी से सामने आया बड़ा अंतर

रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में करीब 54,000 छात्रों ने इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई के सभी चरण सफलतापूर्वक पार किए, लेकिन देश के शीर्ष IIT संस्थानों में मात्र लगभग 18,000 सीटें ही उपलब्ध थीं. यह स्थिति छात्रों की बढ़ती आकांक्षाओं और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा के सीमित अवसरों के बीच बड़े अंतर को उजागर करती है. नाइट फ्रैंक इंडिया के इंटरनेशनल पार्टनर, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर शिशिर बैजल के अनुसार, भारत का शिक्षा क्षेत्र इस समय एक ऐतिहासिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है. उन्होंने बताया कि अब तक 18 अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों को मंजूरी मिल चुकी है या वे देश में अपना संचालन शुरू कर चुके हैं, जिससे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में तेज बदलाव के संकेत मिल रहे हैं.

STEM और AI जैसे क्षेत्रों पर फोकस जरूरी

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे केवल छात्रों की संख्या बढ़ाने के बजाय अपने शैक्षणिक पाठ्यक्रम की गुणवत्ता पर ध्यान दें. खासकर STEM, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा साइंस और मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों पर फोकस जरूरी बताया गया है. रियल एस्टेट सेवाएं देने वाली कंपनी ने दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु और मुंबई को ऐसे शहर बताया है जहां विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए बेहतर संभावनाएं हैं, क्योंकि यहां कॉर्पोरेट ढांचा मजबूत है. वहीं चंडीगढ़, कोच्चि और जयपुर जैसे टियर-2 शहरों को भी बेहतर प्रशासन और बुनियादी ढांचे के कारण उभरते शिक्षा केंद्र के रूप में चिन्हित किया गया है.

मजबूत फैकल्टी और प्रशासनिक ढांचे की जरूरत

रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत फैकल्टी पाइपलाइन तैयार करना अत्यंत आवश्यक होगा. साथ ही ऐसे प्रशासनिक मॉडल विकसित करने की जरूरत है, जो संस्थानों को शैक्षणिक स्वायत्तता प्रदान करते हुए भारतीय नियमों और नीतियों के अनुरूप भी हों.

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