EL Nino: इस साल प्रशांत महासागर में एक सुपर अल नीनो बनने की संभावना तेजी से बढ़ रही है, जिसका पूरी दुनिया के मौसम पर प्रभाव पड़ने वाला है. यह एशिया से लेकर अमेरिका तक बाढ़ और भयंकर सूखे का कारण बन सकती है. बता दें कि जब प्रशांत महासागर की सतह का पानी सामान्य स्तर से ज्यादा गर्म होने लगता है, जिसका असर वायुमंडल पर पड़ता है, उस घटना को अल नीनो कहते हैं.
दरअसल, पिछले कुछ महीनों में प्रशांत महासागर का पानी तेजी से गर्म हुआ है. यूरोपीय क्लाइमेट एजेंसी की सैटेलाइट ने भी हाल ही में प्रशांत महासागर में 1000 किमी चौड़ी गर्म पानी की दीवार (केल्विन वेव) आगे बढ़ते देखी थी. ऐसे में अमेरिका के क्लाइमेट पूर्वानुमान केंद्र के मुताबिक, जुलाई के आखिर तक अल नीनो बढ़ने की संभावना बढ़कर 82% हो गई है, जो कुछ समय पहले 65 प्रतिशत था.
क्या है सुपर अल नीनो
मौसम विभाग अधिकारियों के मुताबिक, इस साल आने वाला अल-नीनो काफी शक्तिशाली हो सकता है, वहीं, 2027 तक इसके एक मजबूत घटना में बदलने की 67% संभावना है, यही वजह है कि इसे सुपर अल-नीनो कहा जा रहा है. वहीं, जब समुद्र की सतह का तापमान लंबे समय के औसत से कम से कम 0.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा हो जाए, और यह स्थिति लगातार पांच महीने तक बनी रहे तब इसे अल नीनो कह सकते है. जबकि एक मजबूत अल नीनो के लिए तापमान का अंतर कम से कम 2 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए.
2027 होगा अब तक का सबसे गर्म साल
बता दें कि अल नीनो की शुरुआत प्रशांत महासागर में होती है, लेकिन इसका असर कई महाद्वीपों तक फैलता है. वहीं, इस बार ये ऐसे समय में आ रहा है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले से ही मध्य पूर्व में युद्ध के कारण ऊर्जा की कमी, उर्वरक की किल्लत और महंगाई के दबाव से जूझ रही है. ऐसे में वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2027 अब तक के सबसे गर्म सालों में से एक हो सकता है.
अल नीनो का दुनिया पर क्या होगा असर
अल नीनो की स्थिति आने से ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्वी एशिया, उत्तरी अमेरिका और कनाडा आमतौर पर ज्यादा गर्म और सूखे हो जाते हैं, जिसके चलते यहां सूखा और जंगल की आग लगने का खतरा बढ़ जाता है. वहीं, भारत में मानसून की बारिश कमी हो सकती है. इसके अलावा दक्षिणी अमेरिका के चिली, अर्जेंटीना और पूर्वी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में ज्यादा बारिश के चलते बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है.
तूफान का खतरा
बता दें कि अल नीनो वाले साल में प्रशांत महासागर में तूफान की गतिविधियां बढ़ जाती हैं. समुद्र का पानी उष्ण कटिबंधीय तूफानों को और ज्यादा ऊर्जा देता है. इसका मतलब है कि एशिया में तूफान से होने वाले नुकसान का खतरा बढ़ सकता है. इस दौरान सूखे की स्थिति से फसलों का नुकसान होने की संभावना बढ़ जाती है. फसलों की कम पैदावार, मछली पकड़ने में कमी और खराब मौसम के कारण पशुओं के मरने से दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा पर खतरा पैदा हो सकता है.
भारत में कमजोर मानसून का अनुमान
अल नीनो की संभावना के चलते भारत ने साल 2026 में कमजोर मॉनसून का अनुमान लगाया है, जिसके 11 वर्षो में सबसे कम बारिश होगी. इससे फसलों, खाने की चीजों की कीमतों और विकास को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. इतना ही नही यह मॉनसून पानी के जरूरी स्रोतों को भरने के लिए सालाना बारिश का लगभग 70% हिस्सा लाता है, कमजोर मॉनसून दबाव बढ़ा सकता है, जो महंगाई को 5.5% के औसत के करीब पहुंचा सकता है.

