Banking Sector Outlook 2026: मजबूत एसेट क्वालिटी और क्रेडिट डिमांड से बैंकिंग सेक्टर पर भरोसा, सर्वे में बड़ा खुलासा

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Banking Sector Outlook 2026: भारत का बैंकिंग सेक्टर मजबूत स्थिति में बना हुआ है और आने वाले समय में इसके प्रदर्शन को लेकर व्यापक रूप से सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं. फिक्की और इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) के एक हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, बेहतर एसेट क्वालिटी, मजबूत पूंजी आधार, रिटेल और एसएमई क्षेत्रों में लगातार बढ़ती क्रेडिट मांग तथा निजी निवेश में सुधार इस मजबूती के प्रमुख कारण हैं. सर्वे में यह भी कहा गया है कि बैंकिंग सेक्टर की बैलेंस शीट पहले के मुकाबले ज्यादा स्थिर और सुदृढ़ हो चुकी है, जिससे आने वाले महीनों में विकास की गति बनी रहने की उम्मीद है.

मजबूत बैलेंस शीट और स्थिर आर्थिक गतिविधियों का सहारा

सर्वेक्षण के मुताबिक, बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत बैलेंस शीट, स्थिर आर्थिक गतिविधियों और अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में बनी हुई मांग का निरंतर समर्थन मिल रहा है. इससे यह संकेत मिलता है कि बैंकिंग सेक्टर न केवल वर्तमान में मजबूत स्थिति में है, बल्कि निकट भविष्य में भी यह स्थिरता बनाए रख सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक गतिविधियों में संतुलित वृद्धि और निवेश में सुधार बैंकिंग प्रणाली को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं.

क्रेडिट ग्रोथ को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण

रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकों को नॉन-फूड क्रेडिट की मांग में लगातार बढ़ोतरी की उम्मीद है. सर्वे में शामिल लगभग 46 प्रतिशत प्रतिभागियों का मानना है कि कुल नॉन-फूड क्रेडिट वृद्धि 11 प्रतिशत से 13 प्रतिशत के बीच रह सकती है. यह संकेत देता है कि अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में ऋण की मांग बनी हुई है और आने वाले समय में यह और मजबूत हो सकती है. रिटेल और सेवा क्षेत्र इस वृद्धि के प्रमुख चालक बने रहेंगे.

बैंकों का अलग-अलग नजरिया

सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि विभिन्न श्रेणी के बैंकों का दृष्टिकोण एक जैसा नहीं है, लेकिन कुल मिलाकर सभी में सकारात्मकता बनी हुई है. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSB) भविष्य को लेकर विशेष रूप से आश्वस्त नजर आए, जिसका मुख्य कारण बेहतर एसेट क्वालिटी, मजबूत पूंजी स्थिति और कॉरपोरेट लोन में बढ़ती दिलचस्पी है. वहीं, निजी क्षेत्र के बैंकों ने क्रेडिट ग्रोथ को लेकर संतुलित और चयनात्मक रुख अपनाया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि वे जोखिम प्रबंधन पर अधिक ध्यान दे रहे हैं. दूसरी ओर, विदेशी बैंकों ने कॉरपोरेट और संस्थागत क्षेत्रों में अपने फोकस के अनुरूप मध्यम स्तर का आशावाद व्यक्त किया, जो उनके सतर्क लेकिन स्थिर दृष्टिकोण को दर्शाता है.

SME और रिटेल सेक्टर बने रहेंगे ग्रोथ के मुख्य स्तंभ

सर्वे में यह भी स्पष्ट किया गया है कि लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र में लोन की मांग मजबूत बनी रहने की संभावना है. बेहतर व्यावसायिक गतिविधियों, क्रेडिट चैनलों के अधिक औपचारिक होने और सरकारी नीतिगत समर्थन के कारण इस क्षेत्र में विस्तार जारी रहने की उम्मीद है. इसके साथ ही, रिटेल लोन भी बैंकिंग क्षेत्र की वृद्धि का एक प्रमुख आधार बना रहेगा, जिससे समग्र क्रेडिट ग्रोथ को मजबूती मिलेगी.

मौद्रिक नीति और ब्याज दरों पर संकेत

सर्वेक्षण के अनुसार, निकट भविष्य में मौद्रिक नीति के व्यापक रूप से स्थिर रहने की उम्मीद है, जिससे विकास और मुद्रास्फीति के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी. हालांकि, सहकारी बैंकों के सभी उत्तरदाताओं ने 25 आधार अंकों की ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना जताई है, जो इस बात का संकेत है कि कुछ क्षेत्रों में सख्ती की जरूरत महसूस की जा रही है.

साइबर सुरक्षा बनी सबसे बड़ी चुनौती

बैंकों ने साइबर सुरक्षा जोखिम को अपने सामने सबसे बड़ी चुनौती के रूप में चिन्हित किया है. डिजिटल बैंकिंग के तेजी से विस्तार के बीच यह खतरा और बढ़ गया है, जिससे बैंकों को अपने सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करने की आवश्यकता महसूस हो रही है.

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