भारत का सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बड़ा कदम: अश्विनी वैष्णव ने गुजरात में पहली एंड-टू-एंड OSAT पायलट लाइन की लॉन्च

Shivam
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केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnav) ने बताया कि 2030 तक वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर पेशेवरों की 10 लाख (1 मिलियन) की भारी कमी देखने को मिल सकती है. उन्होंने इसे भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया और कहा, भारत इस कमी को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकता है. एक मजबूत प्रतिभा आधार विकसित करने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) का एक प्रमुख उद्देश्य कुशल पेशेवरों की एक ग्लोबल पाइपलाइन तैयार करना है.

सेमीकंडक्टर निर्माण में भारत का बड़ा कदम

केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने गुजरात के साणंद में सीजी पावर की भारत की पहली एंड-टू-एंड सेमीकंडक्टर ओएसएटी पायलट लाइन सुविधा के शुभारंभ के अवसर पर कहा कि इस पायलट लाइन का उद्घाटन सेमीकंडक्टर डिजाइन, निर्माण और डाउनस्ट्रीम क्षमताओं को विकसित करने के भारत के सपने को पूरा करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है और गुजरात इस परिवर्तन में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है.

OSAT पायलट लाइन में बने चिप्स से होगा कस्टमर क्वालिफिकेशन

ओएसएटी पायलट लाइन की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए उन्‍होंने कहा कि यहां निर्मित चिप्स का इस्तेमाल कस्टमर क्वालिफिकेशन के लिए किया जाएगा. इन चिप्स के स्वीकृत हो जाने के बाद, कमर्शियल प्लांट के लिए क्वालिफाइड प्रोडक्ट्स का पूर्ण पैमाने पर उत्पादन शुरू करना बहुत आसान हो जाएगा.

सेमीकंडक्टर मिशन को मिली रफ्तार

उन्होंने जोर देकर कहा कि यह उद्घाटन भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत हासिल की गई सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है, जिसके तहत अब तक 10 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है. सरकार ने 270 विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी की है और उन्हें स्टेट-ऑफ-द-आर्ट सेमीकंडक्टर डिजाइन टूल्स से सुसज्जित किया है.

2025 में सेमीकंडक्टर टूल्स का 1.2 करोड़ बार उपयोग

2025 में इन उपकरणों का 1.2 करोड़ से अधिक बार उपयोग किया गया. इसके प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में, 17 संस्थानों द्वारा डिजाइन की गई 20 चिप्स का निर्माण सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला (एससीएल), मोहाली में सफलतापूर्वक किया जा चुका है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दुनिया में बहुत कम देश छात्रों को ऐसे एडवांस्ड टूल्स तक पहुंच प्रदान करते हैं.

सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ा कदम

उन्होंने आगे कहा कि यह पहल भारत के युवाओं को सशक्त बनाएगी, टेक्निकल इकोसिस्टम को मजबूत करेगी और देश को सेमीकंडक्टर टैलेंट के ग्लोबल हब के रूप में स्थापित करेगी. साणंद स्थित सीजी सेमी सुविधा चिप असेंबली, पैकेजिंग, परीक्षण और पोस्ट-टेस्ट सर्विस के लिए संपूर्ण समाधान प्रदान करती है, जिसमें ट्रेडिशनल और एडवांस्ड पैकेजिंग तकनीकें शामिल हैं. यह भारत की सेमीकंडक्टर क्षमताओं को मजबूत करने और वैश्विक बाजारों की सेवा करते हुए आत्मनिर्भर बनने के देश के लक्ष्य को समर्थन देने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

यह भी पढ़े: 2038 तक दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है भारत: EY रिपोर्ट

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