घरेलू स्तर पर मांग मजबूत, आम बजट 2026-27 में सुधारों को जारी रखने पर हो फोकस: CII

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

भारत में कारोबारी माहौल को लेकर भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है और घरेलू मांग भी मजबूती बनाए हुए है. ऐसे में उद्योग जगत को आम बजट 2026-27 में सुधारों की निरंतरता की उम्मीद है. यह जानकारी भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने रविवार को जारी अपने ताजा बिजनेस आउटलुक सर्वे में दी. सर्वे के अनुसार, वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में सीआईआई का बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स बढ़कर 66.5 पर पहुंच गया, जो पिछले पांच तिमाहियों का उच्चतम स्तर है और इसमें लगातार तीसरी तिमाही बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

मांग और निवेश को लेकर कंपनियां आशावादी

रिपोर्ट में बताया गया कि कंपनियां मांग, मुनाफे और निवेश की परिस्थितियों को लेकर आशावादी हैं. सीआईआई के सर्वे में बताया गया कि वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में दो-तिहाई कंपनियों ने मजबूत मांग दर्ज की है, जबकि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 72 प्रतिशत कंपनियों का मानना है कि मांग आने वाले समय में बढ़ सकती है. इसकी प्रमुख वजह जीएसटी दरों में कटौती और त्योहारी सीजन के दौरान खर्च में बढ़ोतरी को माना गया है. सर्वे में यह भी सामने आया है कि कंपनियों की हायरिंग और निवेश से जुड़ी योजनाएं सकारात्मक बनी हुई हैं.

घरेलू सुधारों से उद्योग की वैश्विक चुनौतियों से निपटने की क्षमता बढ़ी

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि बढ़ता कारोबारी भरोसा इस बात को दर्शाता है कि उद्योग वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है, जिसे मजबूत घरेलू मांग और सुधारों का समर्थन मिल रहा है. उन्होंने आगे कहा कि कंपनियां आने वाले महीनों में आर्थिक गतिविधियों और विकास की रफ्तार में और तेजी आने की उम्मीद कर रही हैं. आने वाले आम बजट को लेकर सीआईआई ने कहा कि उसे उम्मीद है कि सरकार भारत को विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में बनाए रखने के लिए सुधारों को जारी रखेगी.

बजट में उच्च कैपेक्स और NIP 2.0 पर जोर

इंडस्ट्री बॉडी ने दीर्घकालिक विकास और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए नीति निर्माताओं को कई सुझाव दिए हैं. बजट को लेकर सीआईआई की एक प्रमुख सिफारिश यह है कि लगभग 150 लाख करोड़ रुपये की संशोधित राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) 2.0 के माध्यम से उच्च पूंजीगत व्यय जारी रखा जाए. सीआईआई ने कहा कि फोकस ऐसी परियोजनाओं पर होना चाहिए जो तुरंत लागू की जा सकें और राजस्व उत्पन्न करें, साथ ही विवादों का त्वरित समाधान किया जाए ताकि अवसंरचना क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा मिल सके.

इंडिया डेवलपमेंट फंड और नियामक डिजिटलीकरण का सुझाव

सीआईआई ने घरेलू और विदेशी पूंजी जुटाने के लिए एक इंडिया डेवलपमेंट एंड स्ट्रैटेजिक फंड स्थापित करने का भी प्रस्ताव दिया है. यह फंड एमएसएमई, स्वच्छ ऊर्जा और कौशल विकास जैसी घरेलू प्राथमिकताओं को समर्थन देने के साथ-साथ भारतीय कंपनियों को रणनीतिक विदेशी निवेश करने में भी मदद कर सकता है. इसके साथ ही अनुपालन का बोझ कम करने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने के लिए सीआईआई ने नियामक डिजिटलीकरण को मजबूत करने की सिफारिश की है. इसके तहत एकीकृत उद्यम पहचान, डिजिटल रिकॉर्ड और रियल-टाइम अनुपालन प्रणालियों के लिए 1,000 करोड़ रुपये के विशेष डिजिटलीकरण कोष का प्रस्ताव रखा गया है.

AI, क्वांटम और ग्रीन एनर्जी पर फोकस

इसके अलावा नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सीआईआई ने 10 उन्नत शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र स्थापित करने की सिफारिश की है, जिनमें से प्रत्येक के लिए 1,000 करोड़ रुपये का बजट तय करने का सुझाव दिया गया है. ये केंद्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्वच्छ ऊर्जा और जैव प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों पर केंद्रित होंगे.

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