सड़क हादसों के पीड़ितों और उनके परिजनों को बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 पेश करते समय घोषणा की कि मोटर एक्सीडेंट मुआवजे पर मिलने वाला ब्याज अब पूरी तरह इनकम टैक्स से मुक्त रहेगा. इस फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पीड़ितों को मिलने वाली मुआवजा राशि पर किसी तरह की कटौती न हो और उन्हें पूरा लाभ मिल सके. इसके तहत अब इस ब्याज पर टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) भी नहीं काटा जाएगा.
नौवें बजट में किया गया अहम ऐलान
यह घोषणा संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लगातार नौवीं बार पेश किए गए केंद्रीय बजट में की गई. इस आम बजट में टैक्स से जुड़े कई अहम ऐलान किए गए. मौजूदा नियमों के तहत मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) द्वारा दिए गए ब्याज को टैक्स योग्य आय माना जाता था.
देरी से बढ़ता था टैक्स बोझ
अक्सर मुआवजा मिलने में देरी होने के कारण ब्याज की राशि काफी बढ़ जाती थी, जिस पर पीड़ितों या उनके परिवारों को इनकम टैक्स देना पड़ता था. इसके चलते कई मामलों में उन्हें मुआवजे की पूरी रकम नहीं मिल पाती थी और इलाज, पुनर्वास व रोज़मर्रा की जरूरतों के लिए मिलने वाले पैसों में भी कमी आ जाती थी. कई बार करदाताओं को टैक्स रिफंड की जटिल प्रक्रिया से भी गुजरना पड़ता था.
सिर्फ आम व्यक्तियों को मिलेगा लाभ
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह टैक्स छूट केवल नेचुरल पर्सन, यानी आम व्यक्ति को मिलने वाले ब्याज पर ही लागू होगी. सरकार ने इसे मानवीय दृष्टिकोण से लिया गया फैसला बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य पीड़ितों और उनके परिजनों को वास्तविक राहत पहुंचाना है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा कि मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल द्वारा किसी व्यक्ति को दिया गया ब्याज इनकम टैक्स से मुक्त होगा और इस पर कोई TDS नहीं काटा जाएगा. यह नया नियम वित्त वर्ष 2026-27 से लागू होने की उम्मीद है, जिससे चल रहे और आने वाले मामलों में पीड़ितों को तुरंत राहत मिलेगी.
सड़क दुर्घटनाएं बनी हुई हैं बड़ी चुनौती
भारत में सड़क दुर्घटनाएं एक बड़ी समस्या बनी हुई हैं. हर साल हजारों लोगों की मौत होती है और कई लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं. मुआवजा हासिल करने के लिए पीड़ितों को अक्सर लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. कई मामलों में फैसले में देरी होने के कारण ब्याज की राशि बढ़ जाती है, जिसे पीड़ितों को हुए नुकसान और मानसिक व आर्थिक परेशानियों की भरपाई के तौर पर दिया जाता है. अब इस ब्याज पर टैक्स हटने से मुआवजे का वास्तविक लाभ सीधे पीड़ितों तक पहुंचेगा.
विशेषज्ञों और बीमा कंपनियों ने किया स्वागत
कानूनी विशेषज्ञों, पीड़ित अधिकार संगठनों और बीमा कंपनियों ने इस फैसले का स्वागत किया है. उनका मानना है कि इससे लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी समस्या का समाधान होगा और मामलों के जल्दी निपटारे को भी बढ़ावा मिल सकता है. यह प्रस्ताव वित्त मंत्री की उस सोच का हिस्सा है, जिसमें टैक्स नियमों को सरल बनाना और ज़रूरतमंद लोगों को सीधी राहत देना शामिल है.
साथ ही बजट में मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक स्थिरता पर भी खास ध्यान दिया गया है. इस टैक्स छूट के जरिए लाखों प्रभावित परिवारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है, जिससे सड़क हादसों के मामलों में मिलने वाला मुआवजा टैक्स कटौती के कारण कम नहीं होगा और पीड़ितों को न्यायपूर्ण राहत सुनिश्चित की जा सकेगी.
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